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भारत में विदेशी वकीलों और लॉ फर्मों को मिली सीमित वकालत की अनुमति, बार एसोसिएशनों में विरोध के स्वर

भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) ने एक ऐतिहासिक फैसले में विदेशी वकीलों और लॉ फर्मों को भारत में सीमित दायरे में वकालत की अनुमति दे दी है। बुधवार, 13 मई को जारी अधिसूचना के अनुसार, बीसीआई ने “बीसीआई नियम, 2022” में संशोधन कर विदेशी वकीलों और लॉ फर्मों को पारस्परिकता के आधार पर भारत में गैर-मुकदमेबाजी (non-litigious) क्षेत्रों में प्रैक्टिस की इजाजत दी है।

कानूनी प्रैक्टिस सीमित रहेगी अंतर्राष्ट्रीय और गैर-मुकदमेबाजी मामलों तक
बीसीआई के संशोधित नियमों के अनुसार, विदेशी वकील भारत में केवल विदेशी कानून, अंतरराष्ट्रीय कानून, मध्यस्थता और सीमा-पार विवादों जैसे गैर-मुकदमेबाजी मामलों में ही सेवाएं दे सकेंगे। उन्हें भारतीय कानून के अंतर्गत किसी प्रकार की मुकदमेबाजी या कोर्ट में पैरवी करने की अनुमति नहीं दी गई है।

इसके अलावा, बीसीआई ने स्पष्ट किया है कि विदेशी वकील केवल उन अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थताओं में भाग ले सकते हैं जिनमें विदेशी या अंतरराष्ट्रीय कानून शामिल हो।

भारतीय वकीलों को भी मिलेगा अवसर
नए नियमों में यह भी प्रावधान है कि पारस्परिकता के आधार पर भारतीय अधिवक्ता और कानूनी फर्म विदेशी वकीलों के रूप में पंजीकरण कर सकेंगे, बशर्ते वे भारतीय मंचों पर अपनी वर्तमान प्रैक्टिस को जारी रखें। इससे भारतीय वकीलों को विदेशी कानून और अंतरराष्ट्रीय मामलों में परामर्श सेवाएं देने का अवसर मिलेगा।

पंजीकरण के लिए सख्त शर्तें और दस्तावेजीकरण अनिवार्य
बीसीआई के नियमों में पंजीकरण के लिए विदेशी वकीलों को प्राथमिक कानूनी योग्यता के प्रमाण, भारत के कानूनों का पालन करने की घोषणा, तथा कानून और न्याय मंत्रालय एवं विदेश मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है।

इसके अतिरिक्त, “फ्लाई-इन फ्लाई-आउट” (FIFO) व्यवस्था के तहत भारत में अस्थायी रूप से आने वाले विदेशी वकीलों को 12 महीनों में अधिकतम 60 दिनों तक ही प्रवास की अनुमति होगी। पंजीकरण अधिकतम पांच वर्षों तक वैध रहेगा।

विरोध में उतरे बार एसोसिएशन
बीसीआई के इस निर्णय के विरोध में वकीलों का एक वर्ग सामने आया है। दिल्ली की सभी जिला अदालतों के बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति के प्रवक्ता अधिवक्ता नीरज ने इस फैसले पर नाराज़गी जताई है। उन्होंने कहा कि बिना भारतीय वकीलों को विश्वास में लिए यह निर्णय जल्दबाज़ी में लिया गया है। उनका कहना है कि यह मुद्दा वर्षों से लंबित था और यदि मांगे नहीं मानी गईं तो वे विरोध में सड़कों पर उतरने को भी तैयार हैं।

भारतीय वकीलों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे: बीसीआई
बीसीआई ने आश्वासन दिया है कि यह संशोधन भारतीय वकीलों की पारंपरिक मुकदमेबाजी की प्रैक्टिस को प्रभावित नहीं करेगा। भारतीय कानून के तहत अदालतों में पैरवी करने का अधिकार केवल भारतीय वकीलों के पास ही रहेगा। परिषद ने कहा कि उसने नियमों को तैयार करते समय भारतीय वकीलों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की है।

Asmita Sarkar

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