
पहल्गाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद तुर्किये द्वारा पाकिस्तान को सैन्य सहयोग देने के चलते देशभर में तुर्किये के बहिष्कार की मांग तेज हो गई है। इसी क्रम में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने भी एक बड़ा कदम उठाते हुए तुर्किये के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ किए गए शैक्षणिक सहयोग समझौता (MoU) को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया है।
जेएनयू का सुरक्षा कारणों से निर्णय
जेएनयू प्रशासन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के चलते लिया गया है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. शांतिश्री धुलिपुडी पंडित ने स्पष्ट किया कि जेएनयू देश और उसके सशस्त्र बलों के साथ खड़ा है और ऐसी किसी भी साझेदारी का समर्थन नहीं करेगा, जो राष्ट्रहित के विरुद्ध हो।
यह शैक्षणिक समझौता 3 फरवरी को तीन साल की अवधि के लिए किया गया था, जिसका उद्देश्य संस्कृति, भाषा, और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना था। इसमें जेएनयू के दो प्रमुख स्कूल शामिल थे—स्कूल ऑफ लैंग्वेज, लिटरेचर एंड कल्चरल स्टडीज (SLL&CS) और स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (SIS)।
पाकिस्तान को तुर्किये का समर्थन बना वजह
भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव, विशेषकर सीमा पार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद, जब दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई पर विराम के लिए 10 मई को समझौता किया, तब यह निर्णय और भी महत्वपूर्ण हो गया। तुर्किये द्वारा पाकिस्तान को रक्षा उपकरण मुहैया कराना और भारत के आतंकी ठिकानों पर जवाबी हमलों की आलोचना करना, इस तनाव की जड़ बना।
देशभर में तुर्किये का विरोध
तुर्किये के पाकिस्तान समर्थन के विरोध में भारतभर में उसके उत्पादों और पर्यटन का बहिष्कार शुरू हो गया है। ईजमाईट्रिप और इक्सिगो जैसे प्रमुख ट्रैवल प्लेटफॉर्म ने भी तुर्किये की यात्रा से बचने की सलाह दी है।
जेएनयू द्वारा लिया गया यह निर्णय न केवल एक शैक्षणिक कदम है, बल्कि यह देश की संप्रभुता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।




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