
जब 2022 के अंत में ChatGPT लॉन्च हुआ, तो दुनियाभर के स्कूलों और कॉलेजों में एआई के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आईं। छात्रों को साफ निर्देश दिए गए—”कोई भी एआई टूल का इस्तेमाल नहीं करेगा”। होमवर्क, निबंध और प्रोजेक्ट्स में ChatGPT से मदद लेना सख्त मना कर दिया गया।
लेकिन अब सवाल उठ रहा है: क्या शिक्षक खुद ChatGPT का उपयोग कर सकते हैं?
छात्रा ने प्रोफेसर को पकड़ा ChatGPT इस्तेमाल करते हुए
अमेरिका की नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी की एक बिजनेस स्टूडेंट एला स्टेपलटन को अपने “Organisational Behaviour” क्लास के नोट्स में कुछ अजीब लगा। एक स्लाइड में लिखा था: “expand on all areas. Be more detailed and specific.”
यह वाक्य एक स्पष्ट AI प्रॉम्प्ट जैसा था। एला को शक हुआ कि कहीं यह प्रोफेसर ने ChatGPT से तो नहीं लिया? उन्होंने आगे जांच की, तो स्लाइड डेक्स और असाइनमेंट्स में AI से बनी इमेज, गड़बड़ फॉन्ट्स और टाइपो जैसे और भी संकेत मिले।
$8,000 की फीस वापस मांगी
एला ने इस आधार पर विश्वविद्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज की और उस कोर्स की $8,000 (लगभग ₹6.5 लाख) की ट्यूशन फीस वापस मांगी। उनका सवाल था सीधा: “अगर छात्रों को एआई टूल्स के इस्तेमाल से रोका गया है, तो शिक्षकों को यह छूट क्यों?”
छात्रों में बढ़ रहा असंतोष
यह मामला अब अकेले एला तक सीमित नहीं है। वेबसाइट Rate My Professors जैसी जगहों पर कई छात्र शिकायत कर रहे हैं कि उनके शिक्षक AI-जनरेटेड स्लाइड्स, रटी-रटाई रोबोटिक फीडबैक, और उबाऊ लेक्चर्स दे रहे हैं—जिनमें मानो ChatGPT की “आंतरिक आवाज़” सुनाई देती है।
शिक्षकों का तर्क: AI मदद करता है
शिक्षकों का कहना है कि एआई टूल्स उनके लिए सहायक हैं—वे इनका इस्तेमाल कंटेंट तैयार करने, आसान और तेज़ काम करने, और छात्रों के लिए बेहतर सामग्री बनाने में करते हैं। लेकिन छात्रों की मांग है कि यदि AI का उपयोग हो रहा है, तो उन्हें इसकी जानकारी दी जानी चाहिए, और नियम सब पर बराबर लागू होने चाहिए।
AI शिक्षा जगत में नई संभावनाएं तो खोल रहा है, लेकिन “नियम किसके लिए?” का सवाल अब छात्रों से शिक्षकों तक पहुंच चुका है। यह बहस सिर्फ एआई टूल्स के इस्तेमाल की नहीं, बल्कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही की भी है।




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