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भारत के डॉक्टरों की कैंसर इलाज के क्षेत्र में बड़ी कामयाबी, सिर्फ 9 दिन में खत्म किया रक्त कैंसर

भारत ने कैंसर इलाज के क्षेत्र में ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। देश के डॉक्टरों ने सिर्फ 9 दिनों में रक्त कैंसर (ब्लड कैंसर) का इलाज कर दिखाया। खास बात यह है कि पहली बार CAR-T सेल थेरेपी पूरी तरह देश में ही विकसित और अस्पताल में तैयार कर मरीजों को दी गई। यह उपलब्धि ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) और CMC वेल्लोर के एक संयुक्त क्लिनिकल ट्रायल ‘Vel-CAR-T’ के तहत हासिल हुई है।

क्या है कार-टी थेरेपी और क्यों है खास?
CAR-T थेरेपी एक उन्नत इम्यूनोथेरेपी तकनीक है जिसमें मरीज के अपने टी-सेल्स को जेनेटिकली मॉडिफाई कर उन्हें कैंसर कोशिकाओं से लड़ने लायक बनाया जाता है। इस ट्रायल में दो प्रकार के रक्त कैंसर—Acute Lymphoblastic Leukemia (ALL) और Large B-cell Lymphoma (LBCL)—के मरीजों का इलाज किया गया।

नतीजे बेहद सकारात्मक
ICMR के अनुसार ALL (एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया) से पीड़ित सभी मरीज पूरी तरह ठीक हो गए। LBCL (लार्ज बी-सेल लिम्फोमा) के आधे मरीजों में कैंसर पूरी तरह खत्म हो गया। कुल मिलाकर, 80% मरीज 15 महीने बाद भी कैंसर-मुक्त पाए गए।

दुनिया से तेज़, 90% सस्ती थेरेपी
जहां दुनिया में CAR-T थेरेपी की प्रक्रिया पूरी करने में औसतन 5 सप्ताह (लगभग 40 दिन) लगते हैं, वहीं CMC वेल्लोर की टीम ने इसे सिर्फ 9 दिन में पूरा कर दिखाया। इस प्रक्रिया में मरीज की ताज़ा कोशिकाओं का उपयोग किया गया जिससे रिकवरी तेजी से हुई। इलाज की लागत वैश्विक स्तर पर $3,80,000 से $5,26,000 (करीब 3-4 करोड़ रुपये) होती है, लेकिन भारत में यह 90% तक सस्ती हो गई है।

भारत में इलाज की नई दिशा
भारत में कैंसर का इलाज अक्सर महंगा होता है और कई मरीजों के पास स्वास्थ्य बीमा नहीं होता। ऐसे में यह नई स्वदेशी CAR-T थेरेपी न सिर्फ कम लागत वाली है बल्कि इसे अस्पताल में ही विकसित कर मरीजों तक जल्दी पहुंचाया जा सकता है। यह मॉडल देशभर के कैंसर रोगियों के लिए उम्मीद की नई किरण है।

कुछ दुष्प्रभाव, लेकिन नियंत्रण में
हालांकि कुछ मरीजों में हल्के दुष्प्रभाव देखे गए, लेकिन कोई न्यूरो टॉक्सिसिटी (तंत्रिका तंत्र पर असर) नहीं पाया गया, जो कि CAR-T थेरेपी में एक आम चिंता होती है।

अगला कदम
ICMR ने इसे कैंसर उपचार में क्रांतिकारी बदलाव बताते हुए कहा है कि यह मॉडल न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर कैंसर के इलाज की दिशा बदल सकता है। भारत हर साल करीब 50,000 नए ल्यूकेमिया मामलों का सामना करता है, और यह तकनीक उन मरीजों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।

Asmita Sarkar

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