Edinbox Hindi

सूखी आंखों के इलाज में मां के दूध से मिलने वाला ‘लैक्टोफेरिन’ हो सकता है कारगर, एम्स का शोध

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (AIIMS) के एक हालिया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि मां के दूध में पाए जाने वाला एक विशेष प्रोटीन लैक्टोफेरिन आंखों के सूखेपन (Dry Eye Syndrome) की समस्या को दूर करने में सहायक हो सकता है। यह शोध नेत्र चिकित्सा और बायोफिजिक्स विभाग के संयुक्त प्रयास से किया गया।

आंखों के सूखेपन की समस्या क्यों है गंभीर?
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक मोबाइल या स्क्रीन का अधिक इस्तेमाल, आंखों की सर्जरी, उम्र बढ़ना, या ऑटोइम्यून बीमारियों के कारण आंखों में सूखापन बढ़ सकता है। यह समस्या यदि समय पर पहचान कर इलाज न हो, तो कॉर्निया को नुकसान, इंफेक्शन, और यहां तक कि दृष्टि हानि तक हो सकती है।

डॉक्टर बताते हैं कि आमतौर पर आंखों में आंसुओं की एक परत बनी रहती है जो उन्हें नमी और सुरक्षा प्रदान करती है। लेकिन सर्जरी के बाद या कुछ विशेष स्थितियों में यह प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है, जिससे आंखें सूखने लगती हैं।

लैक्टोफेरिन कैसे करता है काम?
AIIMS के बायोफिजिक्स विभाग की प्रो. डॉ. सुजाता शर्मा के अनुसार, लैक्टोफेरिन एक ग्लाइकोप्रोटीन है, जो मां के गाढ़े पीले दूध (कोलोस्ट्रम), खून और शरीर के अन्य तरल पदार्थों में पाया जाता है। इसमें रोगाणुरोधी (antimicrobial) और कोशिका वृद्धि (cell growth) बढ़ाने वाले गुण होते हैं।

इस शोध में लैक्टोफेरिन का प्रयोग गोली और आई ड्रॉप्स दोनों रूपों में किया गया। यह मौजूदा उपचार जैसे स्टेरॉयड या साइक्लोस्पोरिन ड्रॉप्स की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में उभरा है।

सर्जरी के बाद 60% मरीजों को होती है सूखी आंख की समस्या
एम्स आर.पी. सेंटर की प्रो. डॉ. नम्रता शर्मा ने बताया कि पोस्ट-रिफ्रैक्टिव सर्जरी (जैसे चश्मा हटाने की LASIK सर्जरी) के बाद करीब 60% मरीजों में आंखों के सूखेपन की समस्या देखी जाती है। इससे कॉर्नियल-न्यूरल-लैक्रिमल रिफ्लेक्स प्रभावित होता है, जो आंसुओं के उत्पादन और पलक झपकने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। इस स्थिति में लैक्टोफेरिन से मरीजों को उल्लेखनीय राहत मिली है।

प्रारंभिक अध्ययन और परिणाम
इस शोध में पहले चरण में 50 मरीजों को शामिल किया गया, जिनकी आंखों की सर्जरी हो चुकी थी। दो ग्रुप बनाए गए: एक को लैक्टोफेरिन दिया गया, जबकि दूसरे को सामान्य देखरेख। नतीजों से पता चला कि लैक्टोफेरिन प्राप्त करने वाले मरीजों की आंखों में आंसू उत्पादन सामान्य हो गया था।

अब 200 मरीजों पर हो रहा है विस्तृत ट्रायल
इस शोध को और प्रभावी बनाने के लिए अब 200 मरीजों पर ट्रायल किया जा रहा है। इसमें नेत्र संबंधी सतह रोग सूचकांक, गैर-आक्रामक टियर ब्रेक अप परीक्षण, शिरमर परीक्षण, लिपिव्यू और नेत्र संबंधी सतह विश्लेषक सहित नैदानिक जांच की जाएगी।

एम्स का यह शोध सूखी आंखों के इलाज में एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प की ओर इशारा करता है। खासकर सर्जरी के बाद या स्क्रीन उपयोग बढ़ने से परेशान लोगों के लिए लैक्टोफेरिन एक क्रांतिकारी समाधान बन सकता है। यदि आगे के परीक्षण भी सफल रहते हैं, तो यह चिकित्सा पद्धति में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed