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डीयू में सैनिकों के लिए न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी कोर्स, शिक्षकों की वरिष्ठता तय करने के नए नियम भी पारित

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) शैक्षणिक सत्र 2025-26 से भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए बीएससी न्यूक्लियर मेडिसिन टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। शुक्रवार को हुई कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह कोर्स दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल में संचालित किया जाएगा।

तीन साल की पढ़ाई और एक साल की इंटर्नशिप वाले इस कोर्स का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों को न्यूक्लियर मेडिसिन में तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करना है, ताकि वे परमाणु चिकित्सा विभागों के संचालन में चिकित्सकों के साथ मिलकर कार्य कर सकें।

कौन ले सकेगा प्रवेश?
इस पाठ्यक्रम में वही उम्मीदवार प्रवेश ले सकेंगे:
– जो भारतीय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा में कम से कम 6 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हों।
– जिनका सेवा रिकॉर्ड उत्कृष्ट हो।

जिन्होंने भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान (या वनस्पति विज्ञान व प्राणी विज्ञान) विषयों के साथ 12वीं की परीक्षा कम से कम 50% अंकों के साथ पास की हो और अंग्रेज़ी एक विषय के रूप में पढ़ी हो।

शिक्षकों की वरिष्ठता को लेकर नया नियम लागू
ईसी बैठक में डीयू से जुड़े कॉलेजों और विभागों में सहायक प्रोफेसरों की वरिष्ठता तय करने संबंधी नए नियमों को भी स्वीकृति मिल गई। यदि दो शिक्षकों की योग्यता समान हो, तो जन्मतिथि के आधार पर वरिष्ठता तय की जाएगी। उम्र समान होने की स्थिति में, एपीआई स्कोर को मानदंड माना जाएगा।

डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बलराम पाणी की अध्यक्षता में बनी समिति की रिपोर्ट के आधार पर ये नियम पारित किए गए हैं। हालांकि परिषद के सदस्य अमन कुमार ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई और एसओएल के स्टडी लर्निंग मटेरियल (SLM) की गुणवत्ता को लेकर चिंता जाहिर की, जिस पर एक समिति बनाए जाने की मांग भी की गई।

अन्य प्रमुख निर्णय
एमए इन जर्नलिज्म: डीयू के हिंदी और अंग्रेजी विभागों में पत्रकारिता में एमए की पढ़ाई शुरू करने के प्रस्ताव को भी ईसी की मंजूरी मिल गई है। हाल ही में दक्षिणी परिसर के पत्रकारिता विभाग में स्टूडियो के उद्घाटन के दौरान कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने इसकी घोषणा की थी।

कोर्स ढांचे में बदलाव: बैठक में विभिन्न प्रोग्रामों के सीबीसीएस व एलओसीएफ आधारित कोर्सों को स्नातक रूपरेखा-2022 और स्नातकोत्तर रूपरेखा-2024 के अनुसार अद्यतन किया गया। ये बदलाव 10 मई को हुई अकादमिक परिषद की सिफारिशों के आधार पर किए गए हैं।

एनईपी 2020 के तहत लचीलापन
बैठक में कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 छात्रों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की सुविधा देती है। इसके तहत कोर्स अधूरा छोड़ने पर भी छात्र सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा पहले की नीति में उपलब्ध नहीं थी, जिससे विद्यार्थियों को बीच में पढ़ाई छोड़ने पर कोई मान्यता नहीं मिलती थी।

श्रद्धांजलि और राष्ट्रीय समर्थन
बैठक की शुरुआत में पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने बताया कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन सिंदूर को विश्वविद्यालय पूर्ण समर्थन देगा। यह प्रस्ताव पहले अकादमिक काउंसिल में पारित हुआ था, जिसे अब कार्यकारी परिषद ने भी मंजूरी दे दी है।

 

Asmita Sarkar

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