
दिल्ली के स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। दिल्ली मेडिकल काउंसिल (DMC) के भंग हो जाने के कारण सैकड़ों डॉक्टरों, विशेषकर फॉरेन मेडिकल ग्रैजुएट्स (FMGs) का करियर अधर में लटक गया है। यह स्थिति न केवल इन युवा डॉक्टरों के भविष्य के लिए, बल्कि राजधानी की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी गहरी चिंता का विषय बन गई है।
काउंसिल भंग, कार्यप्रणाली ठप
हाल ही में दिल्ली सरकार ने DMC को भंग कर दिया है, जिससे इसके निर्वाचित सदस्य अब पद पर नहीं हैं। चिंताजनक बात यह है कि अब तक कोई अंतरिम रजिस्ट्रार भी नियुक्त नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप, परिषद से जुड़ी सारी प्रक्रियाएं — जैसे पंजीकरण, प्रमाण पत्र, इंटर्नशिप स्वीकृति — पूरी तरह ठप हो चुकी हैं।
FMG छात्रों की बढ़ती बेचैनी
भारत में प्रैक्टिस करने के लिए विदेश से मेडिकल डिग्री लेकर लौटे छात्रों को अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है। लेकिन DMC के ठप हो जाने के चलते दिल्ली में ये छात्र महीनों से प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका सवाल है: “हमने समय पर परीक्षा पास की, डॉक्यूमेंट्स जमा किए, फिर भी हमें महीनों इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?”
छात्रों की मांग है कि इस जबरन देरी को उनकी इंटर्नशिप अवधि में से घटाया जाए, ताकि उनका समय और प्रयास बर्बाद न हो।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों की मांग है कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे। उनकी प्रमुख मांगें हैं: DMC में एक अंतरिम रजिस्ट्रार की तुरंत नियुक्ति की जाए ताकि रुकी हुई प्रक्रियाएं दोबारा शुरू हो सकें। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) यह सुनिश्चित करे कि FMGs के लिए पर्याप्त इंटर्नशिप सीटों की व्यवस्था उपलब्ध हो, जिससे छात्रों को अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।
यह संकट दिल्ली की स्वास्थ्य प्रणाली और मेडिकल छात्रों दोनों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि सरकार समय पर कदम नहीं उठाती, तो इससे न केवल करियर बाधित होंगे बल्कि राजधानी की स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।




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