
अमेरिका की शिक्षा मंत्री लिंडा मैकमोहन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हार्वर्ड और कोलंबिया यूनिवर्सिटी जैसी प्रमुख आईवी लीग संस्थाओं के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि इन कदमों के चलते अब ये संस्थान “सार्थक बदलाव” की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
एनबीसी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में मैकमोहन ने कहा कि सरकार के कठोर निर्णयों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आईवी लीग कॉलेजों में व्याप्त कई समस्याओं को अब गंभीरता से लिया जा रहा है।
आईवी लीग अमेरिका की आठ प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थाओं का समूह है, जिसमें ब्राउन, कोलंबिया, कॉर्नेल, डार्टमाउथ, हार्वर्ड, प्रिंसटन, पेंसिल्वेनिया और येल यूनिवर्सिटी शामिल हैं।
हार्वर्ड और कोलंबिया पर कड़ी कार्रवाई
सरकार ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को मिलने वाले 2 अरब डॉलर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी को मिलने वाले 400 मिलियन डॉलर के अनुदान (ग्रांट) को रद्द कर दिया है। यह कदम इस आरोप के बाद उठाया गया कि इन संस्थानों ने अपने कैंपस में यहूदी विरोधी घटनाओं को रोकने में विफलता दिखाई है।
विदेशी छात्रों पर सख्ती
मैकमोहन ने विदेशी छात्रों की कड़ी जांच की आवश्यकता पर बल दिया, विशेष रूप से उन छात्रों पर जो विश्वविद्यालय कैंपस में अस्थिरता फैलाने का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कहा, “यह जरूरी है कि हम सुनिश्चित करें कि जो छात्र इन संस्थानों में पढ़ने आ रहे हैं, वे प्रदर्शनकारी या एक्टिविस्ट न हों।” ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में हार्वर्ड में विदेशी छात्रों के प्रवेश पर रोक लगाई थी, लेकिन अदालत ने इस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है।
वैचारिक संतुलन और शिक्षा मंत्रालय पर टिप्पणी
मैकमोहन ने हार्वर्ड में फैकल्टी के वैचारिक संतुलन पर भी चिंता जाहिर की। उनका कहना है कि रूढ़िवादी विचारधारा वाले प्रोफेसर यूनिवर्सिटी स्टाफ का केवल एक छोटा हिस्सा हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों में चल रहे विविधता, समानता और समावेशन (DEI) कार्यक्रमों को समाप्त करने की मांग भी दोहराई।
इंटरव्यू के दौरान शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह संघीय शिक्षा मंत्रालय को खत्म करने की ट्रंप सरकार की योजना का पूरा समर्थन करती हैं।




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