
अब तक भले ही इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों की पढ़ाई पूरी तरह से भारतीय भाषाओं में शुरू नहीं हो पाई है, लेकिन छात्र अब इन पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं अपनी पसंद की भाषा में दे सकेंगे। यह सुविधा छात्रों को अपनी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में बेहतर प्रदर्शन का मौका देगी।
शिक्षा मंत्रालय ने दी मंजूरी, UGC और AICTE को दिए निर्देश
भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और सकल नामांकन अनुपात (GER) बढ़ाने की दिशा में यह कदम शिक्षा मंत्रालय द्वारा उठाया गया है। इसके लिए यूजीसी (UGC) और एआईसीटीई (AICTE) सहित सभी संबंधित नियामक संस्थाओं को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इस नई व्यवस्था के तहत, भले ही छात्र की पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी या कोई अन्य भाषा रहा हो, लेकिन उसे परीक्षा अपनी चुनी हुई भारतीय भाषा में देने की छूट होगी। हालांकि, इसके लिए छात्रों को परीक्षा से पहले अपने संस्थान को जानकारी देनी होगी।
दो साल पहले बनी थी गाइडलाइन, अब होगा क्रियान्वयन
यूजीसी ने इस विषय में दो साल पहले ही गाइडलाइन तैयार कर ली थी, लेकिन अब मंत्रालय के सक्रिय हस्तक्षेप के बाद इस पर व्यवहारिक अमल शुरू होने जा रहा है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय भाषाओं में तैयार किए गए कोर्स में तकनीकी शब्दों का अनुवाद नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें मूल रूप में ही पढ़ाया जाएगा।
13 भारतीय भाषाओं में हो रही हैं प्रमुख प्रवेश परीक्षाएं
वर्तमान में, नीट-यूजी और जेईई मेन जैसी परीक्षाएं हिंदी, अंग्रेजी और अन्य 11 भारतीय भाषाओं में आयोजित की जा रही हैं। इन भाषाओं में परीक्षा देकर छात्र प्रवेश तो ले लेते हैं, लेकिन अंग्रेजी में पढ़ाई उनके लिए चुनौती बन जाती है। खासकर, ज्ञान होने के बावजूद कई छात्र अंग्रेजी में खुद को अभिव्यक्त नहीं कर पाते, जबकि अपनी मातृभाषा में वे कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
जब तक भारतीय भाषाओं में पढ़ाई नहीं, तब तक मिलेगा विकल्प
मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, जब तक सभी पाठ्यक्रम पूरी तरह भारतीय भाषाओं में उपलब्ध नहीं हो जाते, तब तक छात्रों को परीक्षा की भाषा चुनने की छूट मिलती रहेगी। संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों की भाषाई और भौगोलिक पृष्ठभूमि का ध्यान रखें और उन्हें बेहतर शैक्षणिक अनुभव देने का प्रयास करें।
GER बढ़ाने की रणनीति में भाषा की भूमिका
फिलहाल भारत में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) करीब 29 प्रतिशत है। शिक्षा मंत्रालय मानता है कि भाषाई अड़चन हटाकर और भारतीय भाषाओं में परीक्षा की सुविधा देकर, अधिक से अधिक छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ा जा सकता है।
यह पहल न केवल छात्रों को समान अवसर देगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि भाषा उच्च शिक्षा में बाधा न बने। आने वाले वर्षों में यह कदम भारत को बहुभाषी उच्च शिक्षा प्रणाली की दिशा में अग्रसर करने में मदद करेगा, जहां ज्ञान की अभिव्यक्ति भाषा से सीमित न रहे।




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