
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब केवल कोरियाई स्टडीज और सिनेमा स्टडीज में पीएचडी के लिए ही विश्वविद्यालय की अपनी प्रवेश परीक्षा JNUEE (JNU Entrance Examination) आयोजित की जाएगी। शेष सभी पीएचडी कार्यक्रमों में दाखिला UGC-NET स्कोर के आधार पर होगा।
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार यह फैसला संबंधित विभागों और स्कूलों के आपसी विचार-विमर्श के बाद लिया गया है, न कि प्रशासन या कुलपति स्तर से थोपा गया निर्णय है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि JNU की कार्यप्रणाली विकेंद्रीकृत और लोकतांत्रिक है, जहां निर्णय विभागीय स्तर पर लिए जाते हैं, और इस फैसले पर सभी डीन की सहमति है।
प्रशासन का तर्क है कि UGC-NET और CUET जैसी परीक्षाएं अधिक व्यापक, पारदर्शी और समावेशी हैं। एक अधिकारी ने बताया कि पहले JNUEE केवल 80 परीक्षा केंद्रों पर होती थी, जबकि NET-JRF 200 से अधिक और CUET करीब 500 केंद्रों पर आयोजित होती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विश्वविद्यालय का प्रकाशन रिकॉर्ड हर वर्ष लगभग 5% की वृद्धि दर्शाता है।
हालांकि, छात्र संघ (JNUSU) इस बदलाव से सहमत नहीं है। छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा कि कोरियाई और सिनेमा स्टडीज जैसे विषयों के लिए UGC-NET में कोई विषय उपलब्ध नहीं है, इसीलिए इन क्षेत्रों में JNUEE आयोजित की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि सभी पीएचडी पाठ्यक्रमों के लिए JNUEE को फिर से बहाल किया जाए। इसी मांग को लेकर छात्रसंघ पिछले पांच दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा है।
मंगलवार को कुलपति के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित थी, लेकिन उसे बिना सूचना स्थगित कर दिया गया, जिससे छात्रों में नाराज़गी और बढ़ गई है। यह आंदोलन पिछले गुरुवार से शुरू हुआ, जब विश्वविद्यालय ने पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया की घोषणा की थी।




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