
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के चार आकांक्षी जिलों—कोरापुट, रायगढ़ा, नबरंगपुर और मलकानगिरी—में शिक्षा और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। यह समीक्षा बैठक कोरापुट में आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार के मंत्री, संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
समीक्षा का उद्देश्य: शिक्षा से समग्र विकास की ओर
बैठक का मुख्य उद्देश्य इन पिछड़े जिलों में शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना, और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना था। बैठक में ओडिशा के स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड और उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज भी उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु: शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और स्किल डेवलपमेंट
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि बैठक में स्कूल और उच्च शिक्षा, सकल नामांकन दर (GER), ड्रॉपआउट दर, शिक्षकों की उपलब्धता और प्रशिक्षण, छात्रावास जैसी रिहायशी सुविधाएं, और कौशल विकास जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।
उन्होंने यह भी बताया कि पोषण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास और अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई। उन्होंने विशेष रूप से 0 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य को समग्र रूप से देखने की आवश्यकता पर बल दिया।
₹480 करोड़ की परियोजनाएं और 6 बड़े एमओयू
समीक्षा बैठक से एक दिन पहले, धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा (CUO), कोरापुट में ₹480 करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया।
इसके साथ ही, छह प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग समझौते (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए। ये संस्थान हैं:
IIT भुवनेश्वर
NIT राउरकेला
NISER भुवनेश्वर
IIM संबलपुर
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय
CUO (कोरापुट)
प्रधान का संदेश: केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे विकास
मंत्री ने कहा, “पिछले 8 वर्षों में केंद्र सरकार ने इन आकांक्षी जिलों में कई नई पहलें शुरू की हैं। शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य सरकार के साथ मिलकर हम इन क्षेत्रों के चहुंमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।”




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