
आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर दो मासूम बच्चों की जिंदगी अब बदल चुकी है। राज्य के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश की पहल पर इन दोनों बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाया गया है। अब वे भी दूसरे बच्चों की तरह शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
सीएच पेंचालैया और वी. वेंकटेश्वरलु, दोनों की उम्र सात साल है। ये बच्चे 3 जुलाई को स्कूल निरीक्षण के दौरान नेल्लोर नगर आयुक्त वाई ओ. नंदन से मिले थे और पढ़ने की इच्छा जताई थी। बच्चों की यह मासूम गुहार मंत्री लोकेश तक पहुंची, जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।
मंत्री ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “जब पेंचालैया और वेंकटेश्वरलु ने स्कूल जाने की गुज़ारिश की, तो वह दृश्य दिल को छू गया। मैंने अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए।”
मंत्री ने खुद सौंपा प्रवेश पत्र
5 जुलाई को मंत्री लोकेश ने बच्चों के तत्काल दाखिले के निर्देश दिए, और 7 जुलाई को खुद नेल्लोर के वीआर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन हाई स्कूल के उद्घाटन समारोह में पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने दोनों बच्चों को खुद प्रवेश पत्र सौंपा और पढ़ाई का वादा किया।
मंत्री ने बच्चों से बात कर उन्हें आश्वासन दिया कि शिक्षा विभाग उनके साथ है। उन्होंने कहा कि बच्चों को हर जरूरी मदद दी जाएगी ताकि उनकी शिक्षा में कोई बाधा न आए।
“सर, क्या आप हमें पढ़ा सकते हैं?”
जब बच्चों ने नगर आयुक्त से मासूमियत से पूछा, “सर, क्या आप हमें भी पढ़ा सकते हैं?”, तो उन्होंने बच्चों को अपना नंबर दिया और किसी बड़े के साथ लौटने की सलाह दी थी, ताकि दाखिला कराया जा सके।
अब इन बच्चों को न सिर्फ शिक्षा मिली है, बल्कि राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के तहत सहयोग और निगरानी भी सुनिश्चित की गई है, ताकि उनका भविष्य उज्जवल हो सके।




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