
केंद्र सरकार ने श्रेष्ठ योजना (Scheme for Residential Education for Students in High Schools in Targeted Areas) के तहत पढ़ रहे अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों से किसी भी प्रकार की फीस या अतिरिक्त शुल्क वसूलने वाले स्कूलों को कड़ी चेतावनी दी है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि योजना के नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार उठाएगी शिक्षा से जुड़ा पूरा खर्च
श्रेष्ठ योजना का उद्देश्य है कि कक्षा 9वीं और 11वीं में प्रवेश लेने वाले एससी छात्रों को बेहतर आवासीय स्कूलों में नि:शुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। सरकार इन छात्रों की ट्यूशन फीस, हॉस्टल, भोजन, किताबें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी तक का पूरा खर्च उठाती है।
शिकायतों पर मंत्रालय का सख्त रुख
मंत्रालय ने 7 जुलाई 2025 को जारी पत्र में बताया कि कुछ स्कूलों द्वारा छात्रों से सिक्योरिटी डिपॉजिट, पिकनिक शुल्क, मेडिकल खर्च, यूनिफॉर्म और किताबों के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं। यह श्रेष्ठ योजना की भावना और दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है।
सीबीएसई के जरिए होगी कार्रवाई, हो सकती है ब्लैकलिस्टिंग
मंत्रालय ने कहा है कि दोषी स्कूलों के खिलाफ CBSE के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही ऐसे स्कूलों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
2025-26 सत्र में 3000 सीटें
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए कक्षा 9वीं और 11वीं में कुल 3000 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। सरकार ने उन आवासीय स्कूलों को इस योजना में शामिल होने का आमंत्रण दिया है जो बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन और आधारभूत सुविधाएं प्रदान करते हैं।
क्या है योजना का उद्देश्य?
श्रेष्ठ योजना का लक्ष्य है कि अनुसूचित जाति के मेधावी छात्रों को सशक्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। इसके लिए NTA द्वारा NETS (National Entrance Test for SRESHTA) परीक्षा आयोजित की जाती है। चयनित छात्रों की 12वीं तक की पूरी पढ़ाई का खर्च सरकार उठाती है, और आगे चलकर वे पोस्ट-मैट्रिक या टॉप क्लास स्कॉलरशिप योजनाओं का लाभ भी ले सकते हैं।




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