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गणित में पिछड़ रहे हैं स्कूली छात्र, सिर्फ 53% को आते हैं पहाड़े; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

शिक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 की रिपोर्ट ने देश में स्कूली शिक्षा की मौजूदा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कक्षा 6 के केवल 53% छात्र ही 1 से 10 तक के पहाड़े सही से जानते हैं, जो बच्चों की बुनियादी गणितीय समझ में गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।

गणितीय कौशल में बड़ी कमी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कक्षा 6 के केवल 53% छात्र ही जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी बुनियादी गणनाएं सही ढंग से हल कर पा रहे हैं। कक्षा 3 के सिर्फ 55% छात्र 99 तक की संख्याएं क्रम में लिख सकते हैं। केवल 58% छात्र दो अंकों की जोड़-घटाव कर पाते हैं।

सर्वेक्षण का दायरा
यह सर्वेक्षण दिसंबर 2023 में आयोजित किया गया था, जिसमें देशभर के 36 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों के 781 जिलों में स्थित 74,229 सरकारी और निजी स्कूलों के 21.15 लाख छात्रों को शामिल किया गया। सर्वे मुख्य रूप से कक्षा 3, 6 और 9 के विद्यार्थियों पर केंद्रित था।

विषयवार प्रदर्शन (कक्षा 6)
गणित: 46%
भाषा: 57%
वातावरण अध्ययन (World Around Us): 49%

50% से कम स्कोर वाले इन आंकड़ों से छात्रों की सीखने की क्षमता में कमी साफ झलकती है।

स्कूलों के प्रदर्शन में भी बड़ी असमानता
रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि विभिन्न स्कूलों और कक्षाओं में छात्रों के प्रदर्शन में भारी अंतर देखने को मिला। कक्षा 3 में केंद्रीय विद्यालयों के छात्रों का गणित में प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। कक्षा 6 में राज्य सरकार और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों ने सबसे कमजोर प्रदर्शन किया, खासकर गणित में। कक्षा 9 में केंद्रीय विद्यालयों के छात्रों ने सभी विषयों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिया, विशेष रूप से भाषा में। यह अंतर शैक्षणिक गुणवत्ता की असमानता की ओर स्पष्ट संकेत करता है।

ग्रामीण बनाम शहरी स्कूल: प्रदर्शन का अंतर
ग्रामीण क्षेत्र: कक्षा 3 के ग्रामीण स्कूलों के बच्चों ने गणित और भाषा में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
शहरी क्षेत्र: कक्षा 6 और 9 के शहरी स्कूलों के विद्यार्थियों ने सभी विषयों में ग्रामीण छात्रों को पीछे छोड़ दिया।

परख सर्वेक्षण 2024 की रिपोर्ट से यह साफ होता है कि भारत के स्कूली छात्रों में बुनियादी शिक्षण कौशल, विशेष रूप से गणित में, अभी भी बेहद कमजोर है। इसके साथ ही स्कूलों की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता और क्षेत्रीय असमानता जैसे पहलुओं पर गहन ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि इन मुद्दों का समाधान समय रहते नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों की शैक्षणिक नींव कमजोर हो सकती है।

Asmita Sarkar

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