
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत लागू चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) को एक “विफल योजना” करार दिया है। सोमवार को DUTA प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा जिसमें शिक्षा व्यवस्था, संसाधनों की कमी और नीति निर्माण की प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई गई है। इस ज्ञापन को करीब 2,000 फैकल्टी सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।
“हमारे पास न स्टाफ है, न बजट”
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में DUTA अध्यक्ष प्रो. ए.के. भागी ने कहा, “NEP के तहत चौथे साल को चलाना मौजूदा हालात में संभव नहीं है। छात्रों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन संसाधन और स्टाफ की भारी कमी है। ये पूरी प्रणाली विफलता की ओर जा रही है।”
UGC के नए ड्राफ्ट पर रोक की मांग
DUTA ने बिना वेतन समीक्षा समिति (PRC) की रिपोर्ट के यूजीसी विनियम 2025 के ड्राफ्ट को तुरंत वापस लेने की मांग की है। ज्ञापन शिक्षा मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रपति को सौंपा गया, जो विश्वविद्यालय के विजिटर भी हैं।
संसाधनों की कमी से छात्रों का भविष्य संकट में
प्रो. भागी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही क्लासरूम, स्टाफ और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया, तो FYUP छात्रों के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा, “शैक्षणिक स्वायत्तता की कीमत पर वित्तीय नियंत्रण नहीं स्वीकार किया जाएगा। कॉलेजों को तुरंत विशेष सहायता दी जानी चाहिए।”
DUTA सचिव की टिप्पणियां
डॉ. अनिल कुमार, DUTA के सचिव ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों को लागू करने से पहले व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इन्हें आने वाले 8वें वेतन आयोग में शामिल कर ही लागू किया जाए।
भीड़, देरी और डिजिटल कोर्स को लेकर सवाल
DUTA ने अपनी याचिका में कई और प्रमुख समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया जिनमें कक्षाओं और प्रयोगशालाओं में भीड़भाड़, शैक्षणिक कैलेंडर में देरी, शिक्षकों पर अत्यधिक कार्यभार, SWAYAM और MOOC जैसे ऑनलाइन पाठ्यक्रमों का DU पाठ्यक्रम से असंगत होना और ऑनलाइन क्रेडिट आधारित पाठ्यक्रमों से छात्र-शिक्षक संबंधों में गिरावट और अकादमिक गुणवत्ता में कमी आने की आशंका शामिल है।
DUTA की प्रमुख मांगें
– एम.फिल और पीएचडी के लिए वेतनवृद्धि को फिर से लागू किया जाए
– तदर्थ सेवाओं को प्रमोशन में जोड़ा जाए
– सीनियर प्रोफेसर बनने की मनमानी सीमाएं हटाई जाएं
– प्रमोशन प्रक्रिया को 2 महीनों में पूरा किया जाए
“सुधार थोपे न जाएं”
DUTA ने अंत में राष्ट्रपति और शिक्षा मंत्रालय से संवाद आधारित सुधार प्रक्रिया की अपील की। संघ ने कहा कि सुधार केवल आदेश देकर नहीं लाए जा सकते — शिक्षक हित, शैक्षणिक स्वतंत्रता और भागीदारीपूर्ण चर्चा के आधार पर ही किसी भी नई नीति को लागू किया जाना चाहिए।




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