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किसी एक समुदाय के लिए नहीं बदलेगा स्कूल का समय, सभी छात्रों के हित सर्वोपरि-बोले शिक्षा मंत्री शिवनकुट्टी

केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने स्पष्ट किया है कि सरकार किसी एक समुदाय के लिए स्कूल के समय में बदलाव नहीं कर सकती, क्योंकि उसे लाखों छात्रों के समग्र हितों को ध्यान में रखना होता है। उन्होंने बताया कि स्कूल का समय 30 मिनट बढ़ाने का निर्णय केरल उच्च न्यायालय के निर्देशों पर आधारित है। यदि किसी व्यक्ति या समूह को इससे आपत्ति है, तो वे कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।

मुस्लिम संगठनों के विरोध पर प्रतिक्रिया
मंत्री का यह बयान उन मुस्लिम संगठनों के विरोध के बीच आया है, जो हालिया बदलाव के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। विरोध करने वालों में ‘समस्त केरल जेम-इय्यातुल उलमा’ शामिल है — जो सुन्नी विद्वानों का एक प्रभावशाली संगठन है और केरल में मुस्लिम समुदाय के बीच बड़ा जनाधार रखता है।

शिवनकुट्टी ने कहा, “ये संगठन इसलिए विरोध कर पा रहे हैं क्योंकि राज्य में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) की सरकार है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करती है। क्या ये संगठन उत्तर प्रदेश या गुजरात जैसे राज्यों में ऐसा कर सकते हैं? शायद नहीं।”

मदरसा शिक्षा पर रोक नहीं, पर स्कूल समय में छूट नहीं
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से मदरसा शिक्षा पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन स्कूल समय में किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। गुरुवार को भी उन्होंने धार्मिक संगठनों से अपील की थी कि वे शैक्षणिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें।

यह बयान उस संदर्भ में आया जब खबरें सामने आईं कि ‘समस्ता’ संगठन स्कूल समय में हुए बदलाव का विरोध करने की योजना बना रहा है।

समायोजन का कारण: अनिवार्य शिक्षण समय
मंत्री के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा कैलेंडर और राज्य के नियमों के तहत साल भर में 220 शिक्षण दिवस अनिवार्य हैं। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए, शुक्रवार को छोड़कर हर महीने 16 दिनों तक स्कूल का समय सुबह और दोपहर में 15-15 मिनट बढ़ाया गया है।

 

Asmita Sarkar

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