
जब देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक– IIM कोलकाता– में कथित यौन उत्पीड़न की घटना सामने आती है, तो यह न केवल संस्थान की गरिमा को झकझोरता है, बल्कि पूरे शैक्षणिक तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल भी उठाता है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारे शीर्ष संस्थान केवल बौद्धिक उत्कृष्टता तक सीमित रह गए हैं, या वे अपने छात्रों को एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण देने में भी उतने ही सक्षम हैं?
हाल ही में पुलिस ने इस मामले में एक छात्र को गिरफ्तार कर 19 जुलाई तक रिमांड पर भेजा है। संस्थान के प्रभारी निदेशक सायबल चट्टोपाध्याय का यह बयान कि छात्रों की मानसिक स्थिति और सुरक्षा प्राथमिकता है, प्रशंसनीय जरूर है, लेकिन यह भी एक स्वीकारोक्ति है कि व्यवस्थाएं चूक गई थीं। एक ऐसे कैंपस में जहां देशभर के होनहार छात्र-छात्राएं भविष्य गढ़ने आते हैं, वहां अगर इस तरह की घटना “पहली बार” होती है, तो यह भी एक चेतावनी है कि “पहली बार” कहीं आखिरी न बन जाए।
IIM कोलकाता ने इस मामले को लेकर मीडिया से संवाद सीमित रखने का फैसला लिया है। यह संस्थान की ओर से संवेदनशीलता का परिचायक हो सकता है, लेकिन यह भी जरूरी है कि पारदर्शिता बनी रहे, ताकि पीड़िता और अन्य छात्रों का विश्वास बहाल रह सके।
संस्थान ने बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वह “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाता है, और यही वह संकल्प है, जिसकी आज सबसे अधिक जरूरत है। पर क्या केवल नीतियां कागज पर बनी रहेंगी, या उनका व्यावहारिक क्रियान्वयन भी उतना ही सख्त होगा?
इसी बीच एक अजीब मोड़ तब आया जब पीड़िता के पिता ने घटना से इनकार कर दिया। यह बयान न सिर्फ मामले को उलझाता है, बल्कि यह सवाल भी उठता है कि पीड़िता पर कोई दबाव तो नहीं है? जांच की निष्पक्षता और पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब पुलिस और संस्थान दोनों की जिम्मेदारी है।
पुलिस ने नौ सदस्यीय SIT का गठन किया है – यह जरूरी और स्वागतयोग्य कदम है। लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि शैक्षणिक संस्थानों में सिर्फ कक्षाएं और करियर नहीं, संवेदनशीलता, सम्मान और सुरक्षा का माहौल भी उतना ही अहम है।
यह घटना एक चेतावनी है – न केवल IIM कोलकाता के लिए, बल्कि देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए भी। शैक्षणिक उत्कृष्टता तभी मायने रखती है जब छात्र शारीरिक और मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस करें।
अब वक्त आ गया है कि हम सिर्फ “पहली बार” पर हैरान न हों, बल्कि उसे आखिरी बार बनाने के लिए निर्णायक कदम उठाएं।




Add comment