
केरल सरकार द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए जारी किए गए नए अकादमिक कैलेंडर को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने स्पष्ट किया है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, न कि किसी धार्मिक या सामाजिक भावना को ठेस पहुंचाना।
नए टाइमटेबल के अनुसार, कक्षा 8 से 10 तक के छात्रों को सोमवार से गुरुवार तक प्रतिदिन 15 मिनट सुबह और 15 मिनट दोपहर में अतिरिक्त पढ़ाई करनी होगी। शुक्रवार को यह छूट दी गई है। साथ ही, वर्ष में 204 कार्यदिवस पूरे करने के लिए 6 से 7 शनिवार को भी शिक्षण दिवस के रूप में जोड़ा गया है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर हुआ संशोधन
शिवनकुट्टी ने बताया कि यह बदलाव अगस्त 2024 में केरल हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर किए गए हैं। पिछला कैलेंडर, जिसमें 25 शनिवार को कक्षाएं रखी गई थीं, उसे आवश्यक स्वीकृति के अभाव में अमान्य घोषित किया गया था। इसके बाद एक विशेषज्ञ समिति ने नए प्रस्ताव तैयार किए, जिसमें शनिवारों की संख्या घटा दी गई।
“शिक्षा को राजनीति से दूर रखें” – शिवनकुट्टी का पलटवार
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ लोग शिक्षा विभाग को जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “जब UDF सरकार के समय लैब्बा कमेटी की सिफारिशों पर स्कूल का समय सुबह 9 से शाम 4:30 बजे तक किया गया था, तब किसी ने विरोध नहीं किया। अब इस पर राजनीति क्यों?” उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात, यूपी, दिल्ली, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से अधिक कार्यदिवस होते हैं, यहां तक कि केरल के CBSE और ICSE स्कूलों में भी राज्य स्कूलों से अधिक शिक्षण घंटे हैं।
धार्मिक संगठनों के विरोध पर सरकार का संवाद का प्रस्ताव
समस्त केरल जमीयत उल उलेमा जैसे मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि इससे धार्मिक शिक्षा में बाधा आएगी। इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को संदेह है, तो सरकार खुली बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी बदलाव के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता होगी, जो केवल विधानसभा से संभव है।
शिक्षा के साथ-साथ सह-शैक्षणिक गतिविधियों पर भी जोर
शिवनकुट्टी ने यह भी बताया कि नए शैक्षणिक कैलेंडर में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि नशा विरोधी अभियान, कला और खेल उत्सव, दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष कार्यक्रम और छात्रवृत्तियां भी शामिल की गई हैं। इसका मकसद राज्य के सार्वजनिक शिक्षा तंत्र को अधिक समावेशी और सशक्त बनाना है।




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