
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने एक अहम एडवाइजरी जारी करते हुए भारतीय छात्रों को विदेशी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले से पहले सतर्क रहने की सलाह दी है। एनएमसी ने साफ तौर पर कहा है कि जो कॉलेज FMGL (Foreign Medical Graduate Licensure) रेगुलेशन 2021 का पालन नहीं कर रहे, वहां पढ़ाई करने वाले छात्रों को भारत में मेडिकल प्रैक्टिस की अनुमति नहीं मिलेगी।
एनएमसी ने ऐसे चार विदेशी मेडिकल संस्थानों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है जो भारतीय चिकित्सा मानकों को पूरा करने में असफल पाए गए हैं।
ब्लैकलिस्ट किए गए विदेशी कॉलेज
1. सेंट्रल अमेरिकन हेल्थ एंड साइंसेज यूनिवर्सिटी, बेलीज
2. कोलंबस सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बेलीज
3. वाशिंगटन यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज, बेलीज
4. ताशकंद स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी, चिरचिक शाखा, उज्बेकिस्तान
क्यों उठाया गया कदम?
एनएमसी ने इन संस्थानों को लेकर कई गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं:
– बुनियादी ढांचे की कमी या उसका अभाव
– शैक्षिक व क्लीनिकल ट्रेनिंग की गुणवत्ता बेहद कमजोर
– भारतीय छात्रों के साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न
– अत्यधिक शुल्क व फीस वापसी से इनकार
यह एडवाइजरी मैक्सिको स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के यूरेशिया डिवीजन की रिपोर्ट के आधार पर जारी की गई है।
FMGL नियमों का पालन है जरूरी
FMGL नियम, 2021 के अनुसार कोर्स की अवधि, पढ़ाई का माध्यम, सिलेबस और इंटर्नशिप, नैदानिक प्रशिक्षण सभी भारतीय मानकों के अनुरूप होने चाहिए। जो विदेशी संस्थान इन मानदंडों पर खरे नहीं उतरते, वहां से डिग्री लेने वाले छात्रों को भारत में मेडिकल पंजीकरण नहीं मिलेगा।
पहले से नामांकित छात्र क्या करें?
एनएमसी ने उन छात्रों से जो पहले से किसी विदेशी कॉलेज में नामांकित हैं, तुरंत अपने संस्थान का आकलन करने को कहा है — क्या वह FMGL नियमों को पूरा करता है या नहीं।
भविष्य के छात्रों को सलाह
एनएमसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है: “अगर कोई छात्र चेतावनी की अनदेखी करता है, तो भारत में मेडिकल रजिस्ट्रेशन के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है।”
साथ ही यह भी कहा गया है कि कोई भी विदेशी मेडिकल कॉलेज चुनने से पहले, छात्र और उनके अभिभावक एनएमसी की वेबसाइट पर 19 मई 2025 को अपलोड की गई चेतावनी को ध्यान से पढ़ें।




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