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तेलंगाना की डोमिसाइल नीति की सुप्रीम कोर्ट ने की कड़ी आलोचना, मेडिकल दाखिले के नियमों पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार की मेडिकल प्रवेश के लिए लागू डोमिसाइल नीति की कड़ी आलोचना की। अदालत ने इस नीति को “जमीनी सच्चाई से कटा हुआ” बताया।

फिलहाल तेलंगाना की नीति के अनुसार, राज्य कोटे की मेडिकल सीटों के लिए छात्र तभी पात्र माने जाते हैं जब उन्होंने कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई तेलंगाना में की हो। यह पात्रता नीट (NEET) के माध्यम से दाखिले के लिए लागू की गई है।

इस नीति की न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची भी शामिल थे, ने न्यायसंगतता पर सवाल उठाया।

“क्या कोचिंग के लिए बाहर जाने वाले छात्रों को सज़ा दी जाएगी?”
पीठ ने टिप्पणी की, “कई छात्र मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की बेहतर कोचिंग के लिए कोटा जैसे स्थानों पर जाते हैं। क्या सिर्फ इसलिए कि उन्होंने कक्षा 11 और 12 तेलंगाना के बाहर पढ़ी है, उन्हें प्रवेश से वंचित कर दिया जाए?”

मुख्य न्यायाधीश ने नीति में अधिक मानवीय और समावेशी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “हम नहीं चाहते कि ऐसे छात्र पीड़ित हों। जिन छात्रों के माता-पिता तेलंगाना के डोमिसाइल हैं, उन्हें राज्य कोटे की सीटों के लिए पात्र माना जाना चाहिए, चाहे उन्होंने कक्षा 11-12 कहीं से भी पढ़ाई की हो।”

“या तो सरकार समाधान दे, वरना अदालत करेगी दखल”
सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “या तो आप खुद इस मुद्दे का समाधान करें, नहीं तो हमें इसे ठीक करना पड़ेगा।”

विरोधाभास की ओर इशारा
छात्रों की ओर से पेश वकील रघेन्थ बसंत ने इस नीति के आंतरिक विरोधाभास को उजागर किया। उन्होंने बताया कि अगर केरल से कोई व्यक्ति पिछले चार वर्षों से तेलंगाना में तैनात है, और उसके बच्चों ने कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई राज्य में की है, तो वे राज्य कोटे में पात्र माने जाएंगे। लेकिन, तेलंगाना के मूल निवासी छात्रों को, जिन्होंने बाहर पढ़ाई की है, उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि नीति में संशोधन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि तेलंगाना के सभी निवासियों के बच्चों को, उनकी पढ़ाई की जगह की परवाह किए बिना, राज्य कोटे की सीटों के लिए पात्र माना जाए।

अगली सुनवाई 29 जुलाई को
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई 2025 को निर्धारित की है और तेलंगाना सरकार से तब तक अपने रुख को स्पष्ट करने को कहा है।

Asmita Sarkar

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