
दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत शुरू किए गए चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) को छात्रों का सकारात्मक समर्थन मिल रहा है। उनके अनुसार, लगभग 72% पात्र छात्र चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी रखने का विकल्प चुन चुके हैं।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने छात्रों को 1 अगस्त 2025 तक चौथे वर्ष से बाहर निकलने (Opt-Out) का विकल्प दिया है। यानी, जो छात्र चौथे वर्ष में न पढ़ना चाहें, वे तय समयसीमा के भीतर अपना निर्णय बदल सकते हैं।
50 हजार से अधिक छात्र चौथे वर्ष में कर रहे पढ़ाई जारी
कुलपति ने बताया, “अब तक 72,000 से अधिक पात्र छात्रों में से लगभग 20,221 छात्रों ने चौथे वर्ष से बाहर निकलने का विकल्प चुना है। इसका अर्थ है कि 50,000 से अधिक छात्र चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी रखेंगे, जो दर्शाता है कि FYUP को छात्रों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।”
दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में चौथे वर्ष की कक्षाएं 1 अगस्त 2025 से शुरू होंगी।
FYUP के बहुस्तरीय एग्जिट विकल्प
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप लागू किए गए इस चार वर्षीय कार्यक्रम में कई एग्जिट पॉइंट शामिल हैं:
1 वर्ष बाद: सर्टिफिकेट
2 वर्ष बाद: डिप्लोमा
3 वर्ष बाद: डिग्री
4 वर्ष पूरा करने पर: ऑनर्स विद रिसर्च डिग्री
चौथे वर्ष में छात्रों को शोध, उद्यमिता और कौशल-आधारित शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का अवसर मिलता है। कुलपति सिंह ने मई में दिए एक साक्षात्कार में चौथे वर्ष को “गेम चेंजर” बताया था और कहा था कि यह उच्च शिक्षा को एक नई दिशा देगा।
शिक्षकों और विशेषज्ञों के बीच संशय
हालांकि छात्रों की भागीदारी उत्साहजनक है, लेकिन शिक्षकों और शैक्षणिक विशेषज्ञों के बीच चौथे वर्ष की उपयोगिता और संरचना को लेकर संदेह बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि इस कार्यक्रम की जानकारी स्पष्ट न होने के कारण ड्रॉपआउट की संख्या बढ़ सकती है।
बुनियादी ढांचे और संसाधनों की चिंता
शिक्षकों का यह भी मानना है कि मौजूदा संसाधनों पर बढ़ता बोझ, अपर्याप्त स्टाफ और सीमित वित्तीय सहायता इस कार्यक्रम की प्रभावशीलता पर असर डाल सकते हैं। इन चिंताओं पर कुलपति ने आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय इन सभी चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, “चिंता न करें, अगर सुविधाएं अभी उपलब्ध नहीं हैं, तो उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। यह सब छात्रों के हित में किया जा रहा है।”
अब केवल एक सप्ताह शेष
चूंकि चौथे वर्ष की शुरुआत में अब केवल एक सप्ताह शेष है, ऐसे में दिल्ली विश्वविद्यालय के सामने शैक्षणिक और प्रशासनिक तैयारी को दुरुस्त करने की चुनौती है। आने वाला समय तय करेगा कि यह महत्वाकांक्षी सुधार भारतीय स्नातक शिक्षा प्रणाली में सार्थक बदलाव लाता है या अपूर्ण तैयारी के कारण पीछे छूट जाता है।




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