
धराली (उत्तराखंड) में हाल ही में बादल फटने से हुई भारी तबाही ने एक बार फिर दिखा दिया कि प्राकृतिक आपदाएं कितनी अप्रत्याशित होती हैं। पहाड़ी और बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत-बचाव कार्य की जिम्मेदारी संभालते हैं हेल्थ, सेफ्टी और एन्वॉयरनमेंट (HSE) और आपदा प्रबंधन से जुड़े प्रोफेशनल्स। यही वजह है कि इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए अवसर पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गए हैं।
कौन कर सकता है आवेदन?
– 12वीं (फिजिक्स/मैथ्स और केमिस्ट्री) में न्यूनतम 50% अंक
– उम्र: 19–23 वर्ष
शारीरिक योग्यता:
– पुरुष: लंबाई 165 सेमी, वजन 50 किग्रा
– महिला: लंबाई 157 सेमी, वजन 46 किग्रा
– दृष्टि: 6/6
कोर्स विकल्प और अवधि
– ट्रेड डिप्लोमा इन HSE – 18 माह
– सर्टिफिकेट इन फायर टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्रियल मैनेजमेंट
– डिप्लोमा इन फायर फाइटिंग
– पीजी डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ्टी इंजीनियरिंग
– बीएससी इन फायर इंजीनियरिंग / रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग
(अवधि: 6 माह से 3 साल | प्रवेश: ऑल इंडिया एंट्रेंस एग्जाम)
जरूरी स्किल्स
– धैर्य और साहस
– त्वरित निर्णय लेने की क्षमता
– नेतृत्व कौशल और टीमवर्क
करियर के मौके
आज सरकारी और निजी संस्थानों में फायर इंजीनियर की नियुक्ति अनिवार्य है। इसके अलावा अवसर मिलते हैं—
– अग्निशमन विभाग
– आर्किटेक्चर और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन
– इंश्योरेंस असेसमेंट
– रिफाइनरी, गैस फैक्ट्री, एलपीजी और केमिकल प्लांट
– बहुमंज़िली इमारतें और एयरपोर्ट
कहां से करें पढ़ाई?
– दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग — www.dife.in
– इग्नू, मैदान गढ़ी, नई दिल्ली — www.ignou.ac.in
– नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फायर, डिजास्टर एंड एन्वॉयरनमेंट मैनेजमेंट, नागपुर — www.nifdem.com




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