
सोमवार को लोकसभा में एक अहम विधेयक पेश किया गया, जिसमें भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) गुवाहाटी को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने का प्रस्ताव रखा गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह बिल सदन में प्रस्तुत किया। हालांकि, उस दौरान विपक्ष बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हंगामा कर रहा था।
क्यों है यह बिल खास?
इस प्रस्ताव के तहत आईआईएम गुवाहाटी को भारतीय प्रबंधन संस्थान अधिनियम की अनुसूची में शामिल किया जाएगा। ऐसा होने पर इसे भी अन्य 21 आईआईएम की तरह “राष्ट्रीय महत्व का संस्थान” का दर्जा मिलेगा। अब तक पूर्वोत्तर में कोई भी आईआईएम इस सूची में शामिल नहीं था।
असम के विकास की दिशा में बड़ा कदम
बिल के मसौदे के मुताबिक, केंद्र सरकार, असम सरकार और यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoS) के तहत राज्य में कई विकास परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। आईआईएम गुवाहाटी की स्थापना इन्हीं विशेष विकास योजनाओं का हिस्सा है।
जनसंख्या और भौगोलिक दृष्टि से अहम
असम की 3 करोड़ से अधिक आबादी होने के बावजूद अब तक राज्य में कोई आईआईएम मौजूद नहीं था। राज्य सरकार ने इस मुद्दे को कई बार केंद्र के सामने उठाया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल न केवल असम बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के शैक्षिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम साबित होगी।




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