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ज्ञान की धरोहर: भारत की 5 सबसे पुरानी यूनिवर्सिटीज़

क्या आप जानते हैं? ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज से बहुत पहले भारत में ऐसी महान यूनिवर्सिटीज़ थीं, जो सिर्फ पढ़ाई के स्थान नहीं, बल्कि ज्ञान और सभ्यता के वैश्विक केंद्र थीं। यहां गणित, खगोलशास्त्र, दर्शन, चिकित्सा और बौद्ध अध्ययन जैसे विषयों की अद्भुत शिक्षा दी जाती थी। दुनिया के कोने-कोने से छात्र और विद्वान यहां पढ़ने आते थे। आइए जानते हैं भारत की 5 सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज़ के बारे में।

1. नालंदा यूनिवर्सिटी (Nalanda University) – बिहार
नालंदा को दुनिया की पहली इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी माना जाता है। 425 ईस्वी से 1205 ईस्वी तक यह ज्ञान का पवित्र केंद्र रही। बौद्ध अध्ययन का यह प्रमुख संस्थान चीन, कोरिया, जापान और एशिया के अन्य देशों से छात्रों को आकर्षित करता था। चीनी यात्रियों ह्वेनसांग (Xuanzang) और यिजिंग (Yijing) ने यहां की शिक्षा प्रणाली और जीवनशैली का विस्तार से वर्णन किया है।

2. तक्षशिला (Takshashila) – वर्तमान पाकिस्तान
तक्षशिला 600 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व तक शिक्षा का महान केंद्र रही। यहां चिकित्सा, गणित, सैन्य विज्ञान और राजनीति जैसे विषयों की पढ़ाई होती थी। यह दुनिया के पहले मल्टी-डिसिप्लिनरी शिक्षा संस्थानों में से एक था। विदेशी आक्रमणों के कारण यह नष्ट हो गई, लेकिन इसका प्रभाव आज भी इतिहास में दर्ज है।

3. विक्रमशिला यूनिवर्सिटी (Vikramshila University) – बिहार
8वीं शताब्दी में राजा धर्मपाल द्वारा स्थापित विक्रमशिला यूनिवर्सिटी विशेष रूप से बौद्ध शिक्षा और तर्कशास्त्र के लिए प्रसिद्ध थी। इसमें छह कॉलेज थे, जहां लॉजिक, मीमांसा और बौद्ध अनुष्ठानों की उच्च स्तरीय पढ़ाई होती थी। यह नालंदा की तरह ही विचारों और ज्ञान का आदान-प्रदान करने वाला केंद्र थी।

4. ओदंतपुरी यूनिवर्सिटी (Odantapuri University) – बिहार
पाला राजवंश के संरक्षण में 8वीं से 12वीं शताब्दी के बीच स्थापित, यह यूनिवर्सिटी वज्रयान बौद्ध धर्म और अन्य बौद्ध तथा गैर-बौद्ध विषयों के लिए जानी जाती थी। अपने विशाल हॉल और भव्य इमारतों के कारण यह संस्थान बेहद प्रसिद्ध था और नालंदा व विक्रमशिला के साथ जुड़ा हुआ था।

5. वल्लभी यूनिवर्सिटी (Vallabhi University) – गुजरात
6वीं से 12वीं शताब्दी के बीच गुजरात के भावनगर में स्थापित वल्लभी यूनिवर्सिटी, जैन और बौद्ध दर्शन, चिकित्सा, कानून, कृषि और अर्थशास्त्र जैसे विषयों का केंद्र थी। चीन और मध्य एशिया से छात्र यहां पढ़ने आते थे। यह नालंदा की तरह ही प्रतिष्ठित और प्रभावशाली संस्थान माना जाता था।

ये यूनिवर्सिटीज़ सिर्फ शिक्षा के स्थान नहीं थीं, बल्कि प्राचीन भारत की वैश्विक ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक समृद्धि की पहचान थीं।

Asmita Sarkar

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