
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने बुधवार को गोर बंगा यूनिवर्सिटी (Gour Banga University) के कुलपति (VC) प्रोफेसर पबित्र चट्टोपाध्याय को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया। उन पर कर्तव्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।
राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राज्यपाल, जो राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं, ने यह कदम गंभीर आरोपों के चलते उठाया है।
क्या हैं आरोप?
हाल ही में विश्वविद्यालय के कॉलेज निरीक्षक ने आरोप लगाया था कि अंतरिम वीसी ने कानूनी खर्चों के नाम पर 3 लाख रुपये की मांग की थी। इस मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिकाएं भी दाखिल हुई थीं।
राजभवन अधिकारियों का कहना है कि जिस व्यक्ति पर धन की मांग जैसे आरोप लगे हों, वह वीसी के पद पर बने रहने का हकदार नहीं है। शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और स्वच्छ रखने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। हालांकि, प्रो. चट्टोपाध्याय ने इन सभी आरोपों से साफ इनकार किया है।
दीक्षांत समारोह पर विवाद
गोर बंगा यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह 25 अगस्त को होना था, लेकिन राज्य सरकार के आदेश पर इसे रद्द कर दिया गया। इस पर राज्यपाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार को विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। वीसी इस आदेश का पालन करने में असफल रहे, जिसके चलते उन्हें हटाने का फैसला और तेज हो गया।
कब बने थे वीसी?
राज्यपाल बोस ने अप्रैल 2024 में प्रोफेसर पबित्र चट्टोपाध्याय को राज्य सरकार की सिफारिश पर गोर बंगा यूनिवर्सिटी का कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया था। गौर करने वाली बात यह है कि विश्वविद्यालय 2017 से दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं कर पाया है, जिसकी बड़ी वजह राज्य सरकार और राजभवन के बीच लगातार जारी विवाद रही है।




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