
डेमोक्रेटिक टीचर्स इनिशिएटिव (DTI) ने मांग की है कि शिक्षा मंत्रालय का 2017 का वह आदेश तत्काल वापस लिया जाए, जिसमें एमफिल और पीएचडी करने वाले शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोकने और पहले से दी गई बढ़ोतरी की वसूली करने का प्रावधान है।
DTI ने अपने बयान में कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा 20 अगस्त को प्राचार्यों को दी गई सलाह “सिर्फ दिखावा” है, जिसका मकसद शिक्षकों को गुमराह करना है। संगठन ने इसे “नौटंकी” करार दिया।
शिक्षक संगठनों का विरोध
इस मुद्दे पर आयोजित बैठक को जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत मजूमदार, पूर्व डूटा अध्यक्ष प्रो. नंदिता नारायण, प्रो. धीरज नाइट, जामिया मिलिया इस्लामिया के डॉ. देबदित्य भट्टाचार्य और डीयू की डॉ. उमा गुप्ता ने संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समुदाय शिक्षा मंत्रालय के “अवैध निर्देश” और उसके बाद यूजीसी द्वारा जारी स्पष्टीकरण के खिलाफ एकजुट है।
1 जनवरी 2016 के बाद सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्त जिन शिक्षकों को एमफिल/पीएचडी डिग्री पर अग्रिम वेतन वृद्धि मिली थी, अब उससे वंचित होने और वसूली का खतरा है।
वेतन वृद्धि और वसूली का विवाद
शिक्षक संगठनों के अनुसार, कई शिक्षकों को लाखों रुपये की वसूली के नोटिस भेजे गए हैं, जिसे उन्होंने “जबरन वसूली” कहा है। यह विवाद शिक्षा मंत्रालय के 2017 के उस पत्र से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि उच्च योग्यता के लिए प्रोत्साहन पहले से ही करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत आते हैं, इसलिए अलग से वेतन वृद्धि “लागू नहीं” है।
लेकिन शिक्षकों का तर्क है कि यह 2018 के यूजीसी विनियमों के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट रूप से ऐसी वेतन वृद्धि का प्रावधान है और जिसे राजपत्र में अधिसूचित कर कानूनी बल दिया गया था। DTI नेताओं ने कहा कि यह मामला फिलहाल मार्च 2025 में यूजीसी अध्यक्ष द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की समीक्षा में है। समीक्षा पूरी होने से पहले वसूली करना “मनमाना” और “उचित प्रक्रिया का उल्लंघन” है।
DTI का अभियान तेज करने का ऐलान
DTI नेताओं ने स्पष्ट किया कि कॉलेज और विश्वविद्यालयों के हालिया आदेश केवल नई वेतन वृद्धि मंजूर न करने की बात कहते हैं, न कि पुरानी वृद्धि वापस लेने की।
पहले के यूजीसी मानदंडों के अनुसार नियुक्ति के समय पीएचडी धारकों को 5 वेतन वृद्धि, एमफिल धारकों को 2 वेतन वृद्धि, सेवा के दौरान योग्यता प्राप्त करने पर क्रमशः 3 और 1 वेतन वृद्धि मिलती थी।
DTI ने कहा है कि वह अन्य शिक्षक संगठनों के साथ मिलकर इस आदेश को रद्द कराने के लिए अभियान को और तेज करेगा।




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