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शिक्षा मंत्रालय की नई गाइडलाइन, 100 से अधिक छात्रों वाले संस्थानों में काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य

अब 100 से अधिक नामांकित छात्रों वाले सभी शैक्षणिक संस्थानों में योग्य काउंसलर, मनोवैज्ञानिक या सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति अनिवार्य होगी। छोटे संस्थान बाहरी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों से औपचारिक रेफरल व्यवस्था के तहत जुड़ेंगे।

आत्महत्या रोकथाम और सुरक्षा पर जोर
विधि और न्याय मंत्रालय ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यापक गाइडलाइन जारी की है। यह नियम स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, कोचिंग सेंटर, प्रशिक्षण केंद्र, आवासीय अकादमी और हॉस्टल सभी पर लागू होंगे। कोचिंग हब वाले शहरों में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को निगरानी और जवाबदेही के लिए संस्थागत तंत्र स्थापित करना होगा।

यह गाइडलाइन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तैयार की गई है, जिसमें एक 17 वर्षीय छात्रा की आत्महत्या मामले की सुनवाई हुई थी। शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव रीना सोनोवाल कौली ने इसे सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, यूजीसी, एआईसीटीई और सीबीएसई को भेजा है। दो महीनों में इसका क्रियान्वयन अनिवार्य होगा।

जिला स्तरीय निगरानी समिति
हर जिले में जिलाधिकारी या कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति बनेगी। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बाल संरक्षण विभाग और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति निरीक्षण, निगरानी और शिकायत निवारण का कार्य करेगी।

जोखिम वाले क्षेत्रों पर रोक
आवासीय संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि छत वाले पंखों के ऊपर के हिस्से बंद रखे जाएँ और बालकनी या अन्य जोखिम भरे स्थानों पर पहुँच रोकी जाए। जयपुर, कोटा, सीकर, दिल्ली, चेन्नई और मुंबई जैसे कोचिंग हब शहरों में विशेष सतर्कता बरती जाएगी।

परामर्श और हेल्पलाइन अनिवार्य
– छात्रों और अभिभावकों को नियमित करियर काउंसलिंग दी जाएगी।
– मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों और आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन (जैसे टेली-मानस) के रेफरल के लिए लिखित प्रोटोकॉल बनाए जाएँगे।
– हेल्पलाइन नंबर छात्रावास, कक्षाओं और वेबसाइटों पर बड़े अक्षरों में प्रदर्शित किए जाएँगे।

कैरियर विकल्प और गतिविधियाँ
संस्थान छात्रों को करियर विकल्पों की जानकारी देंगे और पेशेवर काउंसलिंग सत्र आयोजित करेंगे। उन्हें मानसिक दबाव से दूर रखने के लिए योग, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

हाशिये के छात्रों पर विशेष ध्यान
अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, विकलांग और घर से बाहर रह रहे छात्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। छात्रों की क्षमता के आधार पर बैच बनाए जाएँगे और शिक्षकों को साल में दो बार संवेदनशीलता प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उत्पीड़न रोकने के कड़े प्रावधान
जाति, वर्ग, लिंग, धर्म, यौन अभिविन्यास या विकलांगता के आधार पर उत्पीड़न, रैगिंग और बदमाशी की घटनाओं को रोकने के लिए हर संस्थान में गोपनीय और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना होगा। इसके लिए आंतरिक समिति या नामित प्राधिकारी गठित होंगे जो तत्काल कार्रवाई और मानसिक-सामाजिक सहायता सुनिश्चित करेंगे।

सख्त कार्रवाई का प्रावधान
यदि कोई संस्थान इन प्रावधानों का पालन नहीं करता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। छात्र की शारीरिक और मानसिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

Asmita Sarkar

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