
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने दिल्ली हाईकोर्ट को स्पष्ट किया है कि छात्र संघ चुनावों में उम्मीदवारों से किसी भी प्रकार की धनराशि जमा करने की शर्त नहीं रखी गई है। यह जानकारी डीयू ने जस्टिस मिनी पुष्करना की अदालत में दी, जो इस मामले से जुड़ी याचिका की सुनवाई कर रही थीं।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय की नई अधिसूचना के अनुसार डीयू छात्र संघ (DUSU) चुनावों में भाग लेने के लिए उम्मीदवारों को 1 लाख रुपये का सुरक्षा बॉन्ड जमा करना अनिवार्य है।
विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि उम्मीदवारों से केवल सुरक्षा बॉन्ड के साथ एक शपथ पत्र (Affidavit) लिया जाएगा, लेकिन वास्तविक धनराशि जमा करने की कोई बाध्यता नहीं है। अदालत ने इस स्पष्टीकरण को दर्ज करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
याचिका में यह भी कहा गया था कि अधिसूचना के तहत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को स्वयं या उनके समर्थकों द्वारा संभावित नुकसान या नियम उल्लंघन की स्थिति में सुरक्षा बॉन्ड भरना होगा। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि यह प्रावधान लिंगदोह समिति की सिफारिशों के विपरीत है। यह याचिका अंजली और अभिषेक कुमार ने दायर की थी, जिन्होंने कहा कि वे डीयू के छात्र हैं और छात्र संघ चुनावों में हिस्सा लेना चाहते हैं।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इस तरह का “पूर्व वित्तीय प्रावधान” छात्रों के बीच आर्थिक आधार पर भेदभाव करता है, जिससे सामान्य पृष्ठभूमि के छात्र बाहर हो जाते हैं और संपन्न छात्रों को लाभ मिलता है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक भागीदारी) और 21 (जीवन और समान अवसर का अधिकार) का उल्लंघन बताया।




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