
कनाडा में एक बार फिर इमिग्रेशन चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि देश में युवाओं के बीच बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है, जबकि बड़ी संख्या में विदेशी वर्कर्स को एंट्री दी जा रही है।
स्टैटिस्टिक्स कनाडा के अनुसार, देश की कुल बेरोजगारी दर 6.9% है, वहीं युवाओं में यह दर लगभग 15% तक पहुंच चुकी है। विपक्ष का कहना है कि विदेशी वर्कर्स यहां आकर स्थानीय युवाओं की नौकरियां छीन रहे हैं।
विपक्ष का आरोप – रिकॉर्ड संख्या में विदेशी वर्कर्स
प्रिंस एडवर्ड आईलैंड में प्रधानमंत्री पर हमला बोलते हुए कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पोलीव्रे ने कहा, “युवाओं की बेरोजगारी दर पिछले 25 वर्षों के उच्चतम स्तर पर है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री मार्क कार्नी इस साल रिकॉर्ड संख्या में अस्थायी विदेशी वर्कर्स को देश में लाकर नौकरियों पर संकट खड़ा कर रहे हैं।”
गौरतलब है कि अस्थायी विदेशी वर्कर्स को सीमित अवधि के लिए वीजा दिया जाता है। इनमें से कई आगे चलकर परमानेंट रेजिडेंसी (PR) भी हासिल कर लेते हैं।
तय सीमा से ज्यादा वर्कर्स को एंट्री
कंजर्वेटिव पार्टी ने आरोप लगाया कि टेंपरेरी फॉरेन वर्कर्स प्रोग्राम के तहत 2025 की पहली छमाही में सिर्फ 82,000 वर्कर्स को बुलाने की योजना थी, लेकिन यह संख्या 1,05,000 से अधिक हो गई। वहीं, इंटरनेशनल मोबिलिटी प्रोग्राम (IMP) के तहत 2,85,000 की सीमा तय थी, जबकि छह महीने में ही 3,02,000 से ज्यादा वर्कर्स कनाडा आ चुके हैं।
इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) का कहना है कि इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिनके वीजा रिन्यू किए गए हैं।
भारतीयों को सबसे ज्यादा वर्क परमिट
2025 की पहली छमाही में IMP के तहत जारी हुए 3,02,280 वर्क परमिट में से 94,010 भारतीयों को मिले। 2024 में कुल 7,15,870 परमिट में से 2,09,065 भारतीयों को दिए गए थे। 2023 में यह संख्या अधिक थी, जब 7,61,600 परमिट में से 2,50,785 भारतीयों को मिले थे।
वहीं, टेंपरेरी फॉरेन वर्कर्स प्रोग्राम के अंतर्गत 2025 में केवल 16,560 भारतीयों को वीजा मिला। 2024 में यह संख्या लगभग 40,000 और 2023 में करीब 28,000 रही थी।




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