
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को देशभर के 45 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें शिक्षण-सीखने के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, नवीन पद्धतियों के प्रयोग, विद्यार्थियों के समग्र विकास और कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।
नवीन शिक्षण और प्रेरक प्रयासों के लिए राष्ट्रीय सम्मान
पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों ने नवीन शिक्षण पद्धतियों से लेकर पहली पीढ़ी के विद्यार्थियों को प्रेरित करने तक, देशभर में युवा मस्तिष्कों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।
आंध्र प्रदेश के मायलावरम स्थित डॉ. लकीरेड्डी हनीमीरेड्डी सरकारी डिग्री कॉलेज के तेलुगु संकाय के एम. देवानंद कुमार को उनकी अनोखी शिक्षण शैली के लिए सम्मानित किया गया। उनके कार्यों में थल्लापत्र ग्रंथ (ताड़पत्र पांडुलिपियां) बनाना, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) के लिए शैक्षिक वीडियो तैयार करना और शिक्षा में नवाचार शामिल हैं।
विशेषज्ञता और समाजसेवा के लिए सम्मानित शिक्षक
इसी तरह, अरुणाचल प्रदेश स्थित राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान संकाय के प्रो. शांतो कुमार साहा को फोरेंसिक मनोविज्ञान और तंत्रिका मनोविज्ञान में विशेषज्ञता के लिए सम्मान दिया गया। 14 वर्षों से अधिक की शैक्षणिक सेवा के दौरान उन्होंने एक तंत्रिका मनोविज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना की, प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए, महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं का नेतृत्व किया और बाल शोषण पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक सहयोग प्रदान किया। यह उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
प्रधानमंत्री का शिक्षकों को विशेष संदेश
पुरस्कार वितरण से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजेता शिक्षकों से संवाद किया। हल्के-फुल्के अंदाज में उन्होंने कहा कि शिक्षक अक्सर विद्यार्थियों को होमवर्क देते हैं, लेकिन इस बार वह शिक्षकों को होमवर्क देना चाहते हैं—स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और “मेक इन इंडिया” तथा “वोकल फॉर लोकल” अभियानों को आगे बढ़ाना।




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