
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर छात्र विरोध प्रदर्शनों की वजह से चर्चा में है। मंगलवार को इंटर हॉस्टल एडमिनिस्ट्रेशन (IHA) की प्रस्तावित बैठक उस समय स्थगित करनी पड़ी जब बड़ी संख्या में छात्र कन्वेंशन सेंटर के बाहर जुटकर विरोध करने लगे। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन “बैकडोर” से फीस बढ़ोतरी लागू करने की कोशिश कर रहा था।
JNUSU का आरोप: बिना प्रक्रिया अपनाए बुलाई गई बैठक
जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) के अनुसार, प्रशासन ने IHA बैठक बुलाते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। नियमों के अनुसार कम से कम 10 दिन पहले नोटिस जारी होना चाहिए, लेकिन कन्वीनर सुनील यादव को बैठक से महज़ पांच घंटे पहले ही सूचना दी गई। बैठक दोपहर 3 बजे रखी गई थी, जबकि जानकारी सुबह 10 बजे दी गई।
एजेंडे में छिपे शुल्क वृद्धि के प्रस्ताव
छात्र संघ का दावा है कि बैठक के एजेंडे में मेस सुरक्षा जमा राशि, गेस्ट रूम शुल्क, भोजन कूपन, जुर्माना और अन्य हॉस्टल शुल्कों में बढ़ोतरी जैसे प्रस्ताव शामिल थे। इसे “छिपे हुए तरीके से फीस बढ़ाने की कोशिश” बताया गया।
डिजिटल मेस कार्ड पर भी आपत्ति
JNUSU ने यह भी कहा कि प्रशासन “डिजिटल मेस कार्ड” के जरिये निगरानी प्रणाली लागू करना चाहता है। संघ का आरोप है कि चुने गए प्रतिनिधियों को अंतिम समय तक पूरी जानकारी नहीं दी गई, जिससे छात्र प्रतिनिधित्व को कमजोर करने का प्रयास हुआ।
छात्रों ने कहा– मिली बड़ी जीत
छात्रों के विरोध के कारण प्रशासन को बैठक स्थगित करनी पड़ी। JNUSU ने इसे छात्र समुदाय की जीत करार दिया और कहा कि “बैकडोर फीस बढ़ोतरी” की कोशिश नाकाम हो गई। संघ ने छात्रों से सतर्क रहने की अपील करते हुए याद दिलाया कि 2019 में भी फीस बढ़ोतरी के खिलाफ बड़े आंदोलन हुए थे, जिनका मामला अभी दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है।




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