
‘विकसित भारत 2047’ के विजन के तहत युवाओं को सामाजिक बदलाव से जोड़ने की पहल में अब देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों के छात्र भी शामिल होंगे।
विभु नायर ने कहा कि आईआईटी, आईआईएम, एम्स और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्रों को आदिवासी समुदायों और विकास कार्यक्रमों से जोड़कर एक ऐसी युवा पीढ़ी तैयार की जा रही है, जो भारत के शैक्षिक, सामाजिक और उद्यमशील परिदृश्य को नई दिशा देगी।
आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने बताया कि संस्थान को ‘आदि कर्मयोगी स्टूडेंट चैप्टर्स’ के राष्ट्रीय उद्घाटन की मेजबानी करने पर गर्व है। यह मंच छात्रों को आदिवासी क्षेत्रों में मार्गदर्शन, नवाचार और सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर प्रदान करेगा।




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