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भारत की शिक्षा में उद्यमिता: 2,800 स्टार्टअप और 2.8 लाख नौकरियों की संभावनाएं

स्कूल और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में उद्यमिता को शामिल करने से देशभर में लगभग 2,800 छात्र-नेतृत्व वाले स्टार्टअप शुरू हो सकते हैं और करीब 2.8 लाख नए रोजगार के अवसर बन सकते हैं। यह निष्कर्ष प्राइमस पार्टनर्स की एक नई रिपोर्ट में सामने आया है, जो छात्रों, शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और छोटे उद्यमियों सहित 1,500 से अधिक हितधारकों की राय पर आधारित है।

रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों को उद्यमिता की शिक्षा केवल वर्कशॉप तक सीमित न रखकर, व्यवस्थित और चरणबद्ध ढंग से दी जानी चाहिए। इसमें एक रोडमैप सुझाया गया है जो छात्रों की जिज्ञासा को वास्तविक स्टार्टअप निर्माण की दिशा में ले जाता है।

पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर कदम
रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रों के लिए उद्यमिता शिक्षा को जागरूकता, प्रोजेक्ट-आधारित सीख, मेंटरशिप, वित्तीय साक्षरता, इनक्यूबेटर एक्सेस और नेटवर्किंग से जोड़ा जाना चाहिए। राजस्थान का iStart बिजनेस इनोवेशन प्रोग्राम (BIP) जैसे सफल पायलट प्रोजेक्ट यह साबित कर चुके हैं कि कक्षाएं नवाचार की प्रयोगशाला और इनक्यूबेटर बन सकती हैं।

प्राइमस पार्टनर्स की सह-संस्थापक और एमडी चारु मल्होत्रा के अनुसार, भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश तभी आर्थिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा जब युवाओं को सही कौशल और मानसिकता से तैयार किया जाए।

फिनेस फ्रेमवर्क: शिक्षा के केंद्र में उद्यमिता
इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य छात्रों में नवाचार का आत्मविश्वास पैदा करना, वास्तविक समस्याओं को हल करने की क्षमता विकसित करना और स्वतंत्र राह बनाने की सोच को प्रोत्साहित करना है। यह केवल स्टार्टअप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर पीढ़ी तैयार करने का विज़न है।

हर साल 1.2 करोड़ युवा कार्यबल में शामिल
प्राइमस पार्टनर्स के उपाध्यक्ष अमित पुरोहित ने बताया कि हर साल लगभग 1.2 करोड़ युवा भारत के कार्यबल में प्रवेश करते हैं, लेकिन पारंपरिक नौकरियां उन्हें आकर्षित नहीं करतीं। ऐसे में फिनेस फ्रेमवर्क इस चुनौती को अवसर में बदलने का माध्यम बन सकता है, जिससे युवा नवाचार और रोजगार सृजन का केंद्र बनें।

रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि उद्यमिता शिक्षा को एक मुख्य विषय के रूप में अपनाया जाए, न कि केवल पाठ्येतर गतिविधि की तरह। इसके लिए नीतिगत सहयोग, शिक्षक प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वयन की आवश्यकता है। खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान देना होगा, जहां उद्यमिता का माहौल सबसे तेजी से विकसित हो रहा है।

 

Asmita Sarkar

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