
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) राउरकेला के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एक नया मॉडल विकसित किया है, जो भविष्य में व्हीक्युलर एड-हॉक नेटवर्क (VANETs) को और अधिक भरोसेमंद बनाएगा। “Adaptive Contention Window Optimization in Vehicular Networks with Multi-Agent Deep Reinforcement Learning” नामक इस तकनीक को पेटेंट भी मिल चुका है।
क्या बदलेगा?
VANET तकनीक का मकसद है कि सड़क पर चल रहे वाहन आपस में तुरंत सूचना साझा कर सकें—जैसे अचानक ब्रेक लगाना, रास्ते में अवरोध आना या किसी आपात स्थिति का संकेत। फिलहाल चुनौती यह है कि कई गाड़ियां एक साथ संदेश भेजती हैं तो नेटवर्क जाम हो जाता है और जरूरी अलर्ट देर से पहुंचते हैं।
एआई से समाधान
एनआईटी के असिस्टेंट प्रोफेसर अरुण कुमार बताते हैं, “हमने मल्टी-एजेंट डीप रिइन्फोर्समेंट लर्निंग का उपयोग कर ऐसा सिस्टम बनाया है, जो हर वाहन को सिखाता है कि कब संदेश भेजना है। इससे संदेशों का टकराव नहीं होगा और अहम अलर्ट समय पर पहुंचेंगे।”
फायदे
– सड़क हादसों और ट्रैफिक जाम की रोकथाम
– स्मार्ट सिटी और सुरक्षित ड्राइविंग की दिशा में बड़ा कदम
– इलेक्ट्रॉनिक ब्रेक लाइट्स, प्लाटूनिंग, रियल-टाइम नेविगेशन, ई-पेमेंट और इमरजेंसी रिस्पॉन्स जैसी सुविधाओं में क्रांति
बड़ी तस्वीर
2023 में भारत में करीब 4.8 लाख सड़क हादसों में 1.72 लाख मौतें हुईं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी तकनीकें इन हादसों को काफी हद तक रोक सकती हैं। प्रोफेसर बिभुदत्त साहू के मुताबिक, “यह पेटेंट भारत की सड़कों को वाहन-टू-वाहन संचार के लिए तैयार करने का व्यावहारिक कदम है।”




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