
महाराष्ट्र के तालुका खेड़ स्थित प्राथमिक विद्यालय ZP जलिंदरनगर ने इस सप्ताह लंदन में आयोजित 2025 वर्ल्ड्स बेस्ट स्कूल अवॉर्ड्स में कम्युनिटी चॉइस श्रेणी में ऐतिहासिक जीत हासिल की है।
यूके स्थित टी4 एजुकेशन ने कोविड महामारी के बाद इन पुरस्कारों की शुरुआत की थी, ताकि ऐसे स्कूलों को मंच दिया जा सके जो न केवल कक्षा में बल्कि समुदाय में भी बदलाव की मिसाल कायम कर रहे हैं।
आदिवासी क्षेत्र से निकली विश्वस्तरीय शिक्षा की मिसाल
जेडपी जलिंदरनगर स्कूल को अपनी ‘विषय मित्र प्रणाली’ (पीयर-लर्निंग मॉडल) के लिए सराहा गया है, जहां अलग-अलग आयु के छात्र एक-दूसरे को पढ़ाते और सीखते हैं।
स्कूल के शिक्षक दत्तात्रेय वारे ने कहा— “यह हमारे लिए गहरा सम्मान है। 2022 में यहां सिर्फ तीन छात्र बचे थे और स्कूल बंद होने की कगार पर था। लेकिन महज दो वर्षों में यह विश्वस्तरीय मानक तक पहुंच गया।”
50 स्कूलों में सबसे आगे रहा जलिंदरनगर स्कूल
इस पुरस्कार के लिए दुनियाभर से चुने गए 50 स्कूलों में जलिंदरनगर को सबसे अधिक सार्वजनिक वोट मिले। यह सम्मान न सिर्फ इसके शैक्षणिक योगदान बल्कि सामुदायिक प्रभाव को भी रेखांकित करता है।
इस मॉडल के तहत समुदाय के सदस्य और अभिभावक भी योगदान देते हैं—
– इलेक्ट्रॉनिक्स, बढ़ईगीरी, प्लंबिंग, भाषाएं और विज्ञान जैसी कौशल शिक्षा देना
– स्कूल और बगीचों के पुनर्निर्माण व रखरखाव में स्वेच्छा से सहयोग करना
स्कूल और समुदाय की साझेदारी से भविष्य के नेता
स्कूल की यह यात्रा दिखाती है कि जब शिक्षा और समुदाय साथ आते हैं तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है।
टी4 एजुकेशन और वर्ल्ड्स बेस्ट स्कूल प्राइज के संस्थापक विकास पोटा ने कहा— “आज दुनिया बड़े संकटों और चुनौतियों के मोड़ पर खड़ी है। ऐसे स्कूल ही वे केंद्र हैं, जहां से भविष्य के नेता उभरेंगे और जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, युद्ध, गरीबी और पूर्वाग्रह जैसी चुनौतियों के समाधान मिलेंगे।”
जलिंदरनगर का यह सम्मान न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है, जो दिखाता है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समुदाय की शक्ति मिलकर दुनिया को बदल सकती है।




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