
भारतीय मूल के अमेरिकियों ने पिछले डेढ़ दशक में अमेरिकी विश्वविद्यालयों को 26,626 करोड़ रुपये का विशाल दान दिया है। अग्रणी गैर-लाभकारी संगठन इंडियास्पोरा की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, कई भारतीय-अमेरिकी अपनी व्यावसायिक सफलता की जड़ को शिक्षा से जोड़ते हुए अब उन्हीं विश्वविद्यालयों को परिवर्तनकारी योगदान दे रहे हैं, जिन्होंने उनके करियर को दिशा दी।
शिक्षा और नवाचार को मजबूत करने की पहल
इंडियास्पोरा ने बताया कि यह दान न केवल उन संस्थानों के प्रति आभार का प्रतीक है, जिन्होंने भारतवंशियों के जीवन को आकार दिया, बल्कि इससे भावी पीढ़ियों के लिए सीखने, नवाचार और नेतृत्व विकास के समान अवसर भी सुनिश्चित हो रहे हैं।
इससे एक “फ्लाईव्हील इफेक्ट” उत्पन्न हुआ है — जो भारत और अमेरिका के बीच पेशेवर और सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत कर रहा है, साथ ही अमेरिकी शिक्षा तंत्र को भी सशक्त बना रहा है।
शिक्षा को निवेश नहीं, जिम्मेदारी मानते हैं भारतीय-अमेरिकी
इंडियास्पोरा के संस्थापक और अध्यक्ष एम. आर. रंगास्वामी ने कहा— “भारतीय मूल के अमेरिकी शिक्षा में निवेश कर न केवल अमेरिका के भविष्य में योगदान दे रहे हैं, बल्कि सभी नस्लों और पृष्ठभूमियों के लोगों को फलने-फूलने में मदद कर रहे हैं। यह उनकी शिक्षा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
भारतीय-अमेरिकी शिक्षा और अर्थव्यवस्था में अग्रणी
अध्ययन के अनुसार, 78% भारतीय मूल के अमेरिकी स्नातक या उससे ऊंची डिग्री रखते हैं — जो अमेरिकी राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। भारतीय छात्र हर साल 88,752 करोड़ रुपये का आर्थिक योगदान देते हैं और इससे 93,000 नई अमेरिकी नौकरियां उत्पन्न होती हैं। वर्तमान में करीब 2.7 लाख भारतीय छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हैं।
स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग और संस्कृति को मिला प्रमुख दान
रिपोर्ट बताती है कि सार्वजनिक रूप से ज्ञात अधिकांश दान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान, इंजीनियरिंग और बिजनेस एजुकेशन के लिए किए गए हैं।
इसके अलावा लगभग 1,242 करोड़ रुपये का दान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और दक्षिण एशियाई अध्ययन केंद्रों को मिला है — जो भारतीय-अमेरिकी समुदाय की संस्कृति और विरासत को सहेजने की भावना को दर्शाता है।
रिपोर्ट की पृष्ठभूमि
इंडियास्पोरा पिछले कई वर्षों से अमेरिका में भारतीय-अमेरिकियों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक प्रभाव का अध्ययन कर रहा है। इसकी 2024 इंपैक्ट रिपोर्ट, जो बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के सहयोग से तैयार की गई है, इस प्रभाव की नवीनतम झलक पेश करती है — यह बताती है कि कैसे भारतीय-अमेरिकी समुदाय न केवल आर्थिक रूप से बल्कि शिक्षा और सांस्कृतिक सेतु के रूप में भी अमेरिका की प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है।




Add comment