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पंजाब विश्वविद्यालय ने वापस लिया ‘विरोध-नहीं-हलफनामा’, छात्रों ने खत्म किया सात दिन पुराना आंदोलन

Panjab University withdraws 'No Protest Affidavit', students end seven-day protest

पंजाब विश्वविद्यालय ने छात्रों के तीव्र विरोध और सात दिन से जारी आंदोलन के बाद मंगलवार शाम “विरोध-नहीं-हलफनामा” की अनिवार्यता को वापस लेने का फैसला किया। इस फैसले के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में जारी छात्रों का आंदोलन और भूख हड़ताल समाप्त हो गई।

 

विश्वविद्यालय परिसर छात्र परिषद (PUCSC) के महासचिव अभिषेक डागर, जो सात दिनों से भूख हड़ताल पर थे, ने विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले के बाद अपना अनशन खत्म किया। उन्होंने कहा, “यह पंजाब विश्वविद्यालय के हर छात्र की जीत है। हमने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की है।”

 

क्या था विवाद?

विश्वविद्यालय प्रशासन ने हाल ही में प्रथम वर्ष के छात्रों से एक “विरोध-नहीं-हलफनामा” (No Protest Affidavit) भरवाने की शर्त रखी थी। इस हलफनामे में छात्रों को यह घोषित करना था कि वे किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं होंगे।

छात्र संगठनों ने इस कदम को “अलोकतांत्रिक” और “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक” करार देते हुए विरोध शुरू किया था। छात्रों का कहना था कि यह नियम विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक माहौल को कमजोर करता है।

 

विश्वविद्यालय ने किया छात्रों की बात का सम्मान

प्रदर्शन और बातचीत के बाद पंजाब विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की मांगों को स्वीकार कर लिया। विश्वविद्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया— “पंजाब विश्वविद्यालय में छात्रों के हित और शैक्षणिक गतिविधियों के सुचारू संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए हलफनामा/शपथपत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।”

 

बयान में आगे कहा गया कि विश्वविद्यालय रचनात्मक और खुला शैक्षणिक माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां विविध विचारों का सम्मान किया जाएगा और संवाद को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

 

छात्रों ने कानूनी मामला भी वापस लिया

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि आंदोलनकारी छात्र अब इस मुद्दे से संबंधित अपना कानूनी मामला भी वापस ले रहे हैं। इससे परिसर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

आंदोलन का असर

पिछले सप्ताह से जारी इस विरोध के चलते विश्वविद्यालय में कई शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। छात्रों की ओर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन, धरना और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से यह मुद्दा व्यापक चर्चा में आया।

 

अंततः विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद से यह मामला सुलझ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना देश के शैक्षणिक परिसरों में संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व को रेखांकित करती है।

 

एडइनबॉक्स टीम

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