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Left Unity Wins Historic Victory in JNU Students' Union Elections, Wins All Four Central Panel Seats

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में लेफ्ट यूनिटी की ऐतिहासिक जीत, सेंट्रल पैनल की चारों सीटों पर कब्जा

   Left Unity Wins Historic Victory in JNU Students' Union Elections, Wins All Four Central Panel Seats

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रसंघ चुनाव 2025-26 के नतीजे घोषित हो चुके हैं, और इस बार वामपंथी गठबंधन लेफ्ट यूनिटी (AISA, SFI, DSF) ने सेंट्रल पैनल की चारों अहम सीटों — अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव — पर शानदार जीत दर्ज करते हुए एक बार फिर कैंपस में अपना दबदबा कायम किया है।

 

इस चुनाव में करीब 67% छात्रों ने मतदान किया, जो पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर भागीदारी मानी जा रही है। मतगणना के दौरान महासचिव और संयुक्त सचिव पदों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला, लेकिन आखिर में लेफ्ट यूनिटी ने दोनों सीटों पर निर्णायक बढ़त बना ली।

 

चारों सीटों पर लेफ्ट की जीत

अध्यक्ष: अदिति मिश्रा

उपाध्यक्ष: किझाकूट गोपिका बाबू

महासचिव: सुनील यादव

सचिव: दानिश अली

 

अध्यक्ष पद पर लेफ्ट यूनिटी की अदिति मिश्रा ने एबीवीपी (ABVP) के विकास पटेल को 414 वोटों के बड़े अंतर से हराया। मिश्रा को कुल 2,088 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी विकास पटेल को 1,674 वोट प्राप्त हुए।

 

कैंपस में फिर लौटा वामपंथी प्रभुत्व

जेएनयू के छात्रसंघ चुनाव हमेशा से देशभर की छात्र राजनीति का तापमान तय करते हैं। इस बार भी नतीजों ने यह साफ कर दिया कि जेएनयू के छात्रों ने एक बार फिर सामाजिक न्याय, शिक्षा के निजीकरण के विरोध और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों के एजेंडे पर भरोसा जताया है। लेफ्ट यूनिटी की यह जीत सिर्फ एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि जेएनयू की विचारधारा में वामपंथी प्रभाव की पूर्ण वापसी के रूप में देखी जा रही है।

 

एबीवीपी को झटका, काउंसलर स्तर पर सीमित सफलता

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), जिसने पिछले साल संयुक्त सचिव पद जीतकर वापसी की थी, इस बार सेंट्रल पैनल की कोई भी सीट नहीं जीत पाई। हालांकि, संगठन ने काउंसलर सीटों पर कुछ हद तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

एबीवीपी ने चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रवाद, कैंपस अनुशासन और छात्र कल्याण जैसे मुद्दों पर जोर दिया था, जबकि लेफ्ट यूनिटी ने सामाजिक न्याय, समान अवसर और शिक्षा में व्यावसायीकरण के विरोध को अपना प्रमुख मुद्दा बनाया।

 

छात्रों का संदेश स्पष्ट

जेएनयू के छात्रों ने मतदान के माध्यम से एक स्पष्ट संदेश दिया है — वे ऐसी राजनीति के साथ हैं जो समानता, लोकतंत्र और विचार की आज़ादी की बात करती है। यह परिणाम वामपंथी छात्र संगठनों के लिए मनोबल बढ़ाने वाला है और देशभर के विश्वविद्यालयों में होने वाले आगामी छात्र चुनावों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

 

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव 2025-26 के नतीजे इस बात का संकेत हैं कि विश्वविद्यालय का राजनीतिक माहौल अब भी सामाजिक न्याय और छात्र अधिकारों की बहसों से संचालित है। लेफ्ट यूनिटी की यह क्लीन स्वीप न सिर्फ एक संगठन की जीत है, बल्कि उस विचार की भी पुष्टि है जिसने जेएनयू को हमेशा प्रगतिशील विमर्श का केंद्र बनाए रखा है। 

 

 

एडइनबॉक्स टीम

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