
शासन की ओर से संचालित राष्ट्रीय चिकित्सा प्रवेश परीक्षा NEET PG 2025 को लेकर चल रही पारदर्शिता की मांगों के बीच, Supreme Court of India ने NBE को उत्तर कुंजी (Answer Key) जारी करने से जुड़ी अपनी नीति स्पष्ट रूप से देने का आदेश दिया है।
क्या हुआ सुनवाई में?
न्यायमूर्ति P. S. Narasimha और Vipul M. Pancholi की पीठ ने NBE के वकील से पूछा कि परीक्षा की उत्तर कुंजी प्रकाशित करने की नीति क्या है, क्योंकि इस विषय पर अब तक स्पष्ट दस्तावेज़ नहीं मिले।
NBE की ओर से पेश वकील ने बताया कि ये याचिकाएं कोचिंग संस्थानों द्वारा प्रेरित हैं, जो प्रश्न पुस्तिकाओं की उत्तर कुंजी हासिल करना चाहते हैं और इस कारण परीक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
पीठ ने NBE को निर्देश दिया है कि वह शपथपत्र (affidavit) दाखिल करे जिसमें उत्तर कुंजी जारी करने-नही जारी करने की नीति स्पष्ट हो।
क्यों उठी यह मांग?
शिक्षार्थी और प्रवेश परीक्षा से जुड़े पक्ष परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। विशेष रूप से नीचे दिए गए बिंदुओं पर दबाव रहा है:
– उत्तर कुंजी, रॉ स्कोर और सामान्यीकरण (normalisation) सूत्र का सार्वजनिक होना।
– दो शिफ्टों में परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था को निष्पक्षता के दृष्टिकोण से चुनौती मिल रही थी।
उदाहरण के तौर पर, 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि रॉ स्कोर, उत्तर कुंजी और सामान्यीकरण का सूत्र सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
अगले कदम क्या होंगे?
अब NBE को अपनी नीति स्पष्ट करते हुए यह बताना होगा कि क्या वे उत्तर कुंजी प्रकाशित करेंगे, और यदि नहीं, तो क्यों नहीं। इसके बाद अदालत आगे की सुनवाई में इस नीति के आधार पर निर्णय ले सकती है।
यह आदेश मेडिकल स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा प्रणाली में विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में लिया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उम्मीदवारों के लिए क्या मायने रखता है?
– यदि उत्तर कुंजी सार्वजनिक होती है, तो छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं और मूल्यांकन से जुड़े डेटा के आधार पर परीक्षण में पारदर्शिता देख सकेंगे।
– परीक्षा की प्रक्रिया, सीलिंग, सामान्यीकरण एवं अंक निर्धारण पर अधिक भरोसा कायम हो सकेगा।
– भर्ती और काउंसलिंग प्रक्रिया में देरी और अनिश्चितता को कम करने की उम्मीद है। उदाहरण के लिए, NEET-PG 2025 की काउंसलिंग पहले ही देर से शुरू हो रही थी।
इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, न्यायसंगतता और विश्वसनीयता की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।




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