
कर्नाटक सरकार ने डिजिटल शिक्षा और सामावेशिता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। इस कदम के तहत राज्य ने KEO नाम का एक कॉम्पैक्ट, एआई-तैयार पर्सनल कंप्यूटर लॉन्च किया है, जिसे KEONICS (Karnataka State Electronics Development Corporation Limited) के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया गया है।
क्या है KEO, और क्यों ज़रूरी है यह पहल
KEO का पूरा नाम है Knowledge-driven, Economical, Open-source, यानी ज्ञान आधारित, किफायती और खुला स्रोत। इसका मकसद है राज्य में डिजिटल खाई (digital divide) को पाटना — खासकर उन इलाकों और परिवारों में जहां कंप्यूटर की पहुँच बहुत कम है।
कर्नाटक सरकार के अनुसार, राज्य में कंप्यूटर की पहुंच केवल 15% तक है, जबकि देश में भी यह आंकड़ा बहुत कम है। सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियंक खार्गे ने इसे “इन्क्लूजन डिवाइस” कहा है, न कि कोई “लक्ज़री आइटम”।
तकनीकी खूबियाँ और AI-क्षमताएँ
KEO में निम्नलिखित प्रमुख तकनीकी फीचर्स हैं:
– यह ओपन-सोर्स RISC-V प्रोसेसर पर चलता है और ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए Linux (उदा. Ubuntu) का उपयोग करता है।
– कनेक्टिविटी के लिए इसमें 4G, Wi-Fi, इथरनेट, USB-A, USB-C, HDMI और ऑडियो जैक जैसे पोर्ट हैं।
– सबसे दिलचस्प फीचर इसकी ऑन-डिवाइस AI कोर है: यह बिना इंटरनेट के, स्थानीय रूप से AI मॉडल चला सकता है।
इस डिवाइस में पहले से BUDDH नाम का एक AI एजेंट इंस्टॉल है, जिसे कर्नाटक के DSERT पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया गया है, ताकि कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों के छात्र भी शिक्षा संबंधी सहायता प्राप्त कर सकें।
स्टोरेज और RAM: KEO में 32 GB इंटरनल मेमोरी और 1 TB तक एक्सटर्नल स्टोरेज कनेक्शन की क्षमता बताई गई है। बताया जा रहा है कि यह क्वाड-कोर 64-बिट प्रोसेसर है।
उपयोग और संभावित क्षेत्र
KEO को कई तरह के कामों के लिए डिज़ाइन किया गया है:
- शिक्षा: स्कूलों और कॉलेजों में ऑनलाइन लर्निंग, प्रोग्रामिंग, और डिजिटल असाइनमेंट के लिए।
- स्किल डेवलपमेंट: छात्रों को कोडिंग, मशीन कंट्रोल और विज़ुअल कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों से परिचित कराने में मदद।
- सरकारी उपयोग: पंचायत पुस्तकालयों, सरकारी कार्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और पुलिस थानों में दस्तावेज़ीकरण और वेब-आधारित कामों के लिए।
- डिजिटल आजीविका: छोटे व्यवसाय, स्टार्टअप और घरेलू उपयोग में डिजिटल उपकरणों की पहुँच बढ़ाकर आर्थिक अवसरों को बढ़ाने में सहायक।
कीमत, उपलब्धता और वितरण योजना
KEO की लॉन्च कीमत ₹18,999 रखी गई है। यह डिवाइस बेंगलुरु टेक समिट (Bengaluru Tech Summit) 2025 में मुख्य मंत्री सिद्धारमैया द्वारा औपचारिक तौर पर पेश किया गया। KEONICS यह डिवाइस वितरित करेगा। पहले ऑर्डर स्कूलों के लिए जारी किए जा चुके हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि इसे पंचायत पुस्तकालयों, कॉलेजों, छात्रावासों और अन्य सरकारी विभागों तक पहुंचाया जाए। पहले से ही 500 यूनिट का ऑर्डर किसी संगठन द्वारा स्कूलों के लिए दिया गया है। KEONICS के चेयरमैन Sharath Kumar Bache Gowda ने कहा है कि वे राज्य के स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाना चाहते हैं।
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य
– KEO पूरी तरह कर्नाटक में डिज़ाइन और असेंबल किया गया है।
– इसके AI कोर की प्रोसेसिंग पावर लगभग 4–5 TOPS (ट्रिलियन ऑपरेशन्स प्रति सेकंड) के आसपास बताई गयी है।
– BUDDH AI एजेंट DSERT पाठ्यक्रम पर आधारित है और विशेष रूप से कम इंटरनेट वाले इलाकों के छात्रों को मद्दर करता है।
– यह पहला ऐसा राज्य-स्तरीय पर्सनल कंप्यूटर है जिसे सस्ते दाम पर एआई-क्षम बनाया गया है।
चुनौती और आगे की राह
यह पहल बहुत ही महत्वाकांक्षी और सकारात्मक है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं:
उपकरण की पहुँच: सिर्फ कंप्यूटर डिवाइस देना ही काफी नहीं है, छात्रों और घरों को मॉनिटर, कीबोर्ड, माउस जैसी एक्सेसरीज़ की भी ज़रूरत होगी, जिसे अलग से खरीदना पड़ सकता है।
तकनीकी समर्थन (सपोर्ट): ग्रामीण इलाकों में किसी ख़राबी या समस्या होने पर रिपेयर और मेंटेनेंस की सुविधा कैसे मिलेगी, यह महत्वपूर्ण होगा।
भविष्य में स्केल-अप: अगर यह पहल सफल रही, तो अन्य राज्यों के लिए एक रोल मॉडल बन सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन की चुनौतियाँ होंगी।
लंबी अवधि में अपडेट्स: एआई मॉडल और सॉफ्टवेयर को समय-समय पर अपडेट करना होगा ताकि यह पुराने न हो जाए।
कर्नाटक सरकार की यह पहल डिजिटल समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है। KEO न सिर्फ छात्रों और घरों तक कंप्यूटर पहुंचाने में सहायक होगा, बल्कि इससे राज्य में घरेलू कंप्यूटिंग अवसंरचना (infrastructure) भी मजबूत होगी। यदि यह योजना सफल रही, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन सकती है और भारत में सस्ते, लोकल-निर्मित AI-कंप्यूटिंग की नई लहर ला सकती है।




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