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स्टूडेंट्स क्यों कर रहे हैं सुसाइड? 

Why are students committing suicide?

– रईस अहमद ‘लाली’ 

देश के अलग-अलग हिस्सों से पिछले कुछ दिनों में स्कूली बच्चों के सुसाइड की लगातार आ रही खबरों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। मध्य प्रदेश के रीवा में क्लास 11 की 17 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगाकर जान दे दी। सुसाइड नोट में उसने अपने टीचर पर गलत तरीके से हाथ पकड़ने और टॉर्चर करने का आरोप लगाया था। दिल्ली में 16 साल के एक दसवीं के छात्र ने मेट्रो के सामने कूदकर सुसाइड कर लिया और नोट में मेंटल हरासमेंट की बात लिखी। जयपुर में नौ साल की एक बच्ची ने स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी और बाद में पता चला कि वह डेढ़ साल से लगातार बुलिंग का शिकार थी और टीचर को कई बार बताने के बाद भी किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। महाराष्ट्र के कल्याण में 19 साल के एक कॉलेज छात्र ने हिंदी बोलने पर मारपीट के बाद सुसाइड कर लिया। ये घटनाएं दिखाती हैं कि स्कूलों और कॉलेजों में बच्चों के साथ होने वाला गलत व्यवहार, बुलिंग, भेदभाव और मेंटल प्रेशर किस हद तक खतरनाक हो चुका है।

अच्छी बात यह है कि शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) ने बच्चों की मेंटल हेल्थ को लेकर गंभीर प्रयास किए हैं। NEP 2020 साफ कहती है कि शिक्षा सिर्फ मार्क्स की दौड़ नहीं, बल्कि बच्चे के संपूर्ण विकास का साधन है। इस नीति के अनुसार हर स्कूल और कॉलेज में काउंसलिंग सिस्टम जरूरी होना चाहिए, ताकि बच्चे सिर्फ किताबों में न उलझें बल्कि खेल, कला, योगा, संगीत और कम्युनिटी गतिविधियों के साथ एक संतुलित जीवन जी सकें। लोकल भाषाओं में पढ़ाई, पीयर सपोर्ट और हैपीनेस व वेलनेस प्रोग्राम जैसे कदम बच्चों के तनाव को कम करने और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने 2023 में UMMEED नाम से एक व्यापक ड्राफ्ट गाइडलाइन भी जारी की, जिसका मकसद बच्चों की मानसिक सुरक्षा को प्राथमिकता देना है। UMMEED का मतलब है—Understand, Motivate, Manage, Empathise, Empower और Develop। ये गाइडलाइंस कहती हैं कि हर बच्चे की जरूरतें मायने रखती हैं। इसके तहत स्कूलों को एक सुरक्षित माहौल, वेलनेस टीम, काउंसलिंग सुविधा और प्रशिक्षित टीचर्स उपलब्ध कराने की जरूरत है, ताकि जोखिम में पड़े बच्चों की पहचान समय रहते हो सके। टीचर्स और पैरेंट्स को वॉर्निंग साइन्स पहचानने की ट्रेनिंग देने की सलाह दी गई है, जैसे अचानक व्यवहार बदल जाना, मूड स्विंग आना, अकेले रहने लगना या नींद–भूख कम हो जाना। ऐसे संकेत दिखने पर तुरंत सपोर्ट देना ही सबसे बड़ा कदम होता है। सेल्फ-हॉर्म की स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देनी है, और बच्चों की मानसिक स्थिति में सुधार के लिए हर साल समीक्षा कैसे की जाए—इन सबके लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार किया गया है।

कोविड के दौरान शुरू किया गया मनोदर्पण प्रोग्राम अब भी बच्चों की मदद कर रहा है। इस टोल-फ्री नंबर 8448440632 पर 24 घंटे प्रशिक्षित काउंसलर उपलब्ध रहते हैं, जो तनाव, डर, उदासी या किसी भी भावनात्मक समस्या से जूझ रहे बच्चों को तुरंत सहायता प्रदान करते हैं। योगा सेशंस, लाइव काउंसलिंग, और लाइफ स्किल्स ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं बच्चों की मानसिक मजबूती बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हुई हैं।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी बढ़ते छात्र सुसाइड मामलों को देखते हुए देशभर में लागू होने वाली 15 गाइडलाइंस जारी की हैं। जब तक नया कानून नहीं बन जाता, ये गाइडलाइंस सभी स्कूलों, कॉलेजों, हॉस्टल्स और कोचिंग सेंटरों पर लागू रहेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर संस्था को एक यूनिफॉर्म मेंटल हेल्थ पॉलिसी बनानी होगी, जिसे हर साल रिव्यू करके अपनी वेबसाइट पर डाला जाए। बड़े स्कूलों में एक क्वालिफाइड काउंसलर अनिवार्य होगा और छोटे स्कूलों को रेफरल सिस्टम बनाना होगा। परीक्षा के समय बच्चों को व्यक्तिगत मेंटर उपलब्ध कराने और रैंकिंग के आधार पर क्लास बांटने या पब्लिक शेमिंग जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा हॉस्टल्स में सुरक्षा बढ़ाने, रैगिंग और हरासमेंट पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू करने और शिकायत प्रणाली को गोपनीय रखने के निर्देश भी शामिल हैं।

इन सभी गाइडलाइंस का उद्देश्य सिर्फ एक है—बच्चों की जिंदगी को सुरक्षित करना। लेकिन यह तभी संभव है जब स्कूल, माता–पिता और समाज मिलकर इन्हें सख्ती से लागू करें। अगर आपके बच्चे के स्कूल में काउंसलिंग सिस्टम नहीं है, मेंटल हेल्थ पॉलिसी नहीं है या बुलिंग और हरासमेंट को नजरअंदाज किया जा रहा है, तो माता-पिता के रूप में इसे डिमांड करना आपका हक है। और अगर कोई बच्चा तनाव में है, अकेला महसूस कर रहा है या व्यवहार में बदलाव दिखा रहा है, तो देर न करें। तुरंत मनोदर्पण हेल्पलाइन पर संपर्क करें या किसी प्रशिक्षित काउंसलर से बात करवाएं।

जिंदगी अनमोल है। एक सही कदम एक बच्चे की जान बचा सकता है। 

एडइनबॉक्स टीम

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