
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के प्रैक्टिकल एग्जामिनेशन, प्रोजेक्ट और इंटरनल असेसमेंट के लिए नई गाइडलाइंस और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) जारी करते हुए स्कूलों को सख्त पालन के निर्देश दिए हैं। बोर्ड हर साल इन परीक्षाओं का आयोजन करता है, लेकिन इस बार प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
स्कूलों के लिए सख्त निर्देश
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि सभी स्कूलों को नई SOPs का पालन करना अनिवार्य होगा। इस बार बोर्ड की चार परीक्षाएं आयोजित की जानी हैं, ऐसे में समय प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती रहेगा।
बोर्ड ने कहा है कि सभी प्रैक्टिकल, प्रोजेक्ट और इंटरनल असेसमेंट निर्धारित समय में पूरे किए जाएं। वेब-पोर्टल पर अपलोड किए जाने वाले मार्क्स पूरी तरह सही होने चाहिए, क्योंकि अपलोड के बाद किसी भी तरह का सुधार स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रैक्टिकल आंसर बुक में नया फीचर
इस साल प्रैक्टिकल आंसर बुक में एक नया फीचर जोड़ा गया है। इसके तहत इंटरनल और एक्सटर्नल दोनों परीक्षकों को यह अंडरटेकिंग देनी होगी कि सभी डेटा सही तरीके से अपलोड किया गया है। इससे गलत मार्क्स अपलोड होने की संभावना पर लगाम लगाने का प्रयास किया गया है।
प्रैक्टिकल परीक्षा की तिथियां घोषित
CBSE ने 2026 बोर्ड प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए समयसारणी भी जारी की है।
स्कूल श्रेणी प्रैक्टिकल परीक्षा की तिथियां
नियमित सत्र वाले स्कूल 1 जनवरी 2026 से 14 फरवरी 2026
शीतकालीन (विंटर बाउंड) स्कूल 6 नवंबर 2025 से 6 दिसंबर 2025
स्कूलों से कहा गया है कि वे अपनी संस्थागत समयसारणी इन्हीं तिथियों के अनुसार तैयार करें और पूरे कार्यक्रम को समय पर पूरा करें।
रेगुलर छात्रों के लिए गाइडलाइंस
प्रैक्टिकल/प्रोजेक्ट/इंटरनल असेसमेंट सिर्फ उन्हीं रेगुलर छात्रों के लिए होंगे, जिनका नाम स्कूल द्वारा LOC (List of Candidates) में भेजा गया है। यदि किसी छात्र का नाम सूची में शामिल नहीं मिलता, तो स्कूल को तुरंत अपने क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क करना होगा। स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करना है कि वास्तविक छात्र ही परीक्षा में उपस्थित हो रहा है।
प्राइवेट उम्मीदवारों के लिए नियम
CBSE ने प्राइवेट उम्मीदवारों को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। इनके प्रैक्टिकल/प्रोजेक्ट/इंटरनल मार्क्स बोर्ड की तय नीति और परीक्षा उपविधियों के अनुसार दिए जाएंगे। यदि किसी कारण प्रैक्टिकल दोबारा कराने की आवश्यकता होती है, तो प्रक्रिया बोर्ड के नियमों के मुताबिक ही होगी।
स्कूलों को निर्देश हैं कि वे सभी प्राइवेट उम्मीदवारों को बोर्ड की नीति स्पष्ट रूप से समझाएं।
क्या बदला है इस बार?
– SOPs में सख्ती
– गलत मार्क्स अपलोड पर रोक
– दोनों परीक्षक अब डेटा की जिम्मेदारी लेंगे
– समयसीमा के भीतर प्रैक्टिकल आयोजित करना अनिवार्य
CBSE की नई गाइडलाइंस का उद्देश्य पूरे सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाना और प्रक्रिया को एकरूप रखना है ताकि देशभर में बोर्ड परीक्षाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सके।




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