
तमिलनाडु की उच्च शिक्षा व्यवस्था इन दिनों राजनीतिक विवादों के केंद्र में है। राज्य भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने डीएमके सरकार पर आरोप लगाया है कि उसकी नीतियों ने राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों को आर्थिक संकट में धकेल दिया है। नागेंद्रन का कहना है कि सरकार की “लापरवाही और गलत प्राथमिकताओं” के कारण कई ऐतिहासिक संस्थान बुनियादी खर्चों को भी पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मद्रास विश्वविद्यालय की स्थिति को बताया ‘शर्मनाक’
नागेंद्रन ने हाल में आई उन खबरों पर गहरी चिंता जताई जिनमें दावा किया गया कि मद्रास विश्वविद्यालय ने पेंशन बकाया देने के लिए अपने कॉर्पस फंड से 95 करोड़ रुपये निकालने पड़े। उनका कहना है कि यह कदम साफ दिखाता है कि संस्थान किस हद तक आर्थिक दबाव में है।
उन्होंने इसे “शर्मनाक स्थिति” बताते हुए कहा कि इतनी पुरानी और प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी का इस तरह बुनियादी आवश्यकताओं के लिए कॉर्पस राशि का इस्तेमाल करना बताता है कि वित्तीय सहायता का कोई और स्रोत बचा ही नहीं है।
कॉर्पस फंड के इस्तेमाल पर सवाल
कॉर्पस फंड का उपयोग किसी भी संस्था की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। आमतौर पर यह राशि केवल ब्याज के रूप में खर्च होती है। नागेंद्रन के मुताबिक, मूल राशि का उपयोग करना इस बात का संकेत है कि विश्वविद्यालय के पास रूटीन खर्च—जैसे वेतन और पेंशन—के लिए भी पर्याप्त फंड नहीं हैं।
उन्होंने दावा किया कि वित्तीय संकट के चलते विश्वविद्यालय सालों से पर्याप्त संख्या में प्रोफेसरों की नियुक्ति नहीं कर पा रहा है।
अन्य विश्वविद्यालय भी फंड की कमी से जूझ रहे
नागेंद्रन ने कहा कि सिर्फ मद्रास विश्वविद्यालय ही नहीं, बल्कि कामराज विश्वविद्यालय और अन्नामलाई विश्वविद्यालय में भी फैकल्टी द्वारा वेतन और पेंशन बकाया को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
उनके अनुसार, इन संस्थानों में प्रशासन का जवाब एक जैसा है—“फंड उपलब्ध नहीं है।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह स्थिति अब तमिलनाडु की उच्च शिक्षा प्रणाली में बार-बार दोहराया जाने वाला संकट बनती जा रही है।
सरकार के प्रचार खर्च पर भी सवाल
नागेंद्रन ने डीएमके सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जहां एक ओर विश्वविद्यालय फंड की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार करोड़ों रुपये प्रचार अभियानों पर खर्च कर रही है।
उनका आरोप है कि राज्य सरकार तमिलनाडु को “शिक्षा क्षेत्र का मॉडल” बताने में व्यस्त है, जबकि वास्तविकता यह है कि विश्वविद्यालयों को जरूरी वित्तीय सहायता नहीं मिल रही।
सरकार से तुरंत कदम उठाने की अपील
नागेंद्रन ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों की मौजूदा स्थिति छात्रों के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि सरकार बिना देरी प्रभावी कदम उठाए, ताकि संस्थानों की वित्तीय स्थिरता बहाल की जा सके और उच्च शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ता दबाव कम किया जा सके।




Add comment