
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे, जिसे लंबे समय से देश के सबसे उज्ज्वल स्टार्टअप्स का लॉन्चपैड माना जाता है, ने चुपचाप एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठा लिया है। संस्थान ने पहली बार अपनी खुद की कंपनी बनाई है। यह कोई इनक्यूबेटेड स्टार्टअप या फैकल्टी द्वारा शुरू की गई पहल नहीं, बल्कि पूरी तरह IIT बॉम्बे के स्वामित्व और नियंत्रण वाली संस्था है।
7 नवंबर को ‘BharatGen Technology Foundation’ को मुंबई के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ के साथ रजिस्टर किया गया। कंपनी का पता भी IIT बॉम्बे, पवई का ही है—यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश का शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को आकार देने के लिए एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
BharatGen देश का पहला ऐसा प्रयास है जिसमें एक बड़े भाषा मॉडल (Large Language Model) को भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता के अनुसार तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना की रूपरेखा पिछले साल तब बनी जब विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने इसके लिए शुरुआती तौर पर 235 करोड़ रुपये की सहायता दी। यह संकेत था कि भारत सार्वजनिक AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव लगा रहा है। यह प्रोजेक्ट DST के National Mission on Interdisciplinary Cyber-Physical Systems (NM-ICPS) के तहत समर्थित है।
IIT बॉम्बे के नेतृत्व में BharatGen कंसोर्टियम में देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं—IIT मद्रास, IIT कानपुर, IIIT हैदराबाद, IIT मंडी, IIT हैदराबाद, IIM इंदौर, IIT खड़गपुर और IIIT दिल्ली।
IIT बॉम्बे के प्रोफेसर और BharatGen Technology Foundation के संस्थापक निर्देशक प्रो. गणेश रामकृष्णन ने कहा,
“मॉडल्स को लैब से मार्केट तक ले जाने के लिए किसी कॉरपोरेशन की स्वायत्तता और काम करने की स्वतंत्रता जरूरी होती है। सिर्फ एक अकादमिक प्रोजेक्ट के रूप में यह संभव नहीं था।”
BharatGen को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह 22 से अधिक भारतीय भाषाओं में काम कर सके। यह टेक्स्ट, स्पीच और डॉक्यूमेंट विज़न को जोड़ता है, ताकि AI उसी तरह जानकारी समझ सके जैसे आम भारतीय नागरिक बोलते, पढ़ते और तकनीक से संवाद करते हैं। इसका उद्देश्य सिर्फ बड़े भाषा मॉडल बनाना नहीं, बल्कि ऐसे मॉडल तैयार करना है जो भारत की आवाज़ और सोच को सही मायने में प्रतिबिंबित करें।
प्रो. रामकृष्णन के अनुसार BharatGen की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसे भारतीय भाषाओं और देश में विकसित किए गए डेटा सेट्स पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे ये मॉडल वास्तविक परिस्थितियों में ज्यादा भरोसेमंद साबित होंगे।
उन्होंने बताया कि फाउंडेशन डेवलपर्स के लिए अपने मॉडल के हल्के (distilled) वर्ज़न भी जारी करेगा। इससे स्टार्टअप और कंपनियां बिना भारी लागत या विशेषज्ञता के सीधे भारतीय संप्रभु AI (Sovereign AI) का उपयोग कर सकेंगी। उनके शब्दों में, “BharatGen मुश्किल काम करेगा, ताकि देश के इनोवेटर्स सीधे निर्माण और नवाचार पर ध्यान दे सकें।”
अब MeitY ने IndiaAI Mission के तहत इस पहल को और आगे बढ़ाते हुए 1,058 करोड़ रुपये की अतिरिक्त फंडिंग दी है। इससे BharatGen को एक राष्ट्रीय Sovereign AI परियोजना के रूप में विस्तारित किया जा रहा है।




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