
कॉलेज और विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों की सबसे बड़ी चिंता होती है—डिग्री। कई बार परीक्षा का रिजल्ट समय पर आ जाता है, लेकिन डिग्री के लिए छात्रों को महीनों-सालों तक इंतज़ार करना पड़ता है। इसका सीधा असर सरकारी नौकरियों, प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में प्रवेश पर पड़ता है।
छात्रों की इसी परेशानी को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक अहम फैसला लिया है। अब सभी विश्वविद्यालयों को परीक्षा परिणाम जारी होने के 180 दिनों के भीतर डिग्री देना अनिवार्य होगा।
UGC का साफ निर्देश: समय पर डिग्री नहीं तो कार्रवाई
UGC ने देशभर के सभी विश्वविद्यालयों और उनके कुलपतियों को निर्देश जारी किया है कि रिजल्ट घोषित होने के छह महीने के अंदर छात्रों को उनकी डिग्री उपलब्ध कराई जाए। यदि कोई कॉलेज या विश्वविद्यालय इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर समेत देश की सभी राज्य और केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर लागू होगा।
छात्रों की शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
दरअसल, UGC को बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय सहित कई विश्वविद्यालयों के छात्रों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। छात्रों का कहना था कि परीक्षा पास करने के एक साल बाद भी उन्हें डिग्री नहीं मिलती, जिससे वे न तो नौकरी के लिए आवेदन कर पा रहे हैं और न ही आगे की पढ़ाई के लिए।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए UGC ने यह स्पष्ट समय-सीमा तय की है, ताकि छात्रों का भविष्य प्रशासनिक देरी की वजह से प्रभावित न हो।
बिहार समेत कई राज्यों में गंभीर समस्या
खबरों के अनुसार बिहार की कई विश्वविद्यालयों में डिग्री जारी करने की प्रक्रिया बेहद धीमी रही है। कई मामलों में छात्रों की डिग्री वर्षों तक अटकी रहती है। बीआरएबीयू समेत अन्य विश्वविद्यालयों में भी ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां डिग्री में देरी के कारण छात्रों को एडमिशन और रोजगार के मौके गंवाने पड़े।
डिग्री नहीं मिलने की वजह से छात्र न तो सरकारी भर्तियों में आवेदन कर पाते हैं और न ही पीजी या अन्य प्रोफेशनल कोर्स में समय पर दाखिला ले पाते हैं।
छात्रों के लिए राहत भरा कदम
UGC का यह फैसला लाखों छात्रों के लिए राहत लेकर आया है। तय समय-सीमा लागू होने से विश्वविद्यालयों पर जवाबदेही बढ़ेगी और छात्रों को अपनी मेहनत का औपचारिक प्रमाण समय पर मिल सकेगा।
अब यह जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की है कि वे नियमों का सख्ती से पालन करें, ताकि छात्रों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनका करियर समय पर आगे बढ़ सके।




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