
आज के समय में हेल्थ सेक्टर सिर्फ डॉक्टर बनने तक सीमित नहीं रह गया है। बढ़ती आबादी, निजी अस्पतालों का विस्तार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मांग ने पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स की जरूरत को तेजी से बढ़ाया है। इसी संदर्भ में वरिष्ठ डॉक्टर निखिल बंसल का कहना है कि पैरामेडिकल कोर्स आज के युवाओं के लिए सुरक्षित, स्थिर और ग्रोथ वाला करियर रास्ता बन सकते हैं।
B.Sc नर्सिंग
डॉ. बंसल के मुताबिक, B.Sc नर्सिंग को दुनिया के सबसे स्थिर हेल्थकेयर करियर में गिना जाता है। आईसीयू, एनआईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और इमरजेंसी सेवाओं में नर्सिंग स्टाफ की हमेशा मांग रहती है। यही वजह है कि भारत के साथ-साथ विदेशों में भी नर्सिंग प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के अच्छे मौके मिलते हैं। इस कोर्स में प्रवेश राज्य या कॉलेज स्तर की प्रवेश परीक्षाओं और कई जगह मेरिट के आधार पर होता है। शुरुआती सैलरी 25 से 40 हजार रुपये तक हो सकती है, जो अनुभव के साथ एक लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT)
बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) भी तेजी से उभरता करियर है। खेल, न्यूरोलॉजी और ऑर्थोपेडिक्स जैसे क्षेत्रों में फिजियोथेरेपिस्ट की मांग लगातार बढ़ रही है। इस कोर्स में दाखिले के लिए कई राज्यों में अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं होती हैं, जबकि कुछ संस्थानों में CUET या NEET स्कोर भी मांगा जाता है। फिजियोथेरेपिस्ट अस्पताल, क्लीनिक या अपनी निजी प्रैक्टिस के जरिए अच्छी कमाई कर सकते हैं।
बैचलर ऑफ मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी (BMLT)
कोरोना के बाद बैचलर ऑफ मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी (BMLT) की अहमियत और बढ़ी है। पैथोलॉजी लैब, आईवीएफ सेंटर और बड़े अस्पतालों में इनकी भारी मांग है। इस कोर्स में दाखिला अधिकतर मेरिट या संबंधित कॉलेज की प्रवेश परीक्षा के आधार पर होता है।
B.Sc रेडियोलॉजी या इमेजिंग
इसी तरह B.Sc रेडियोलॉजी या इमेजिंग भी एक हाई-डिमांड कोर्स है। सीटी स्कैन, एमआरआई और एक्स-रे जैसे आधुनिक जांच उपकरणों को चलाने वाले प्रशिक्षित टेक्निशियन के बिना अस्पतालों का काम संभव नहीं है। अनुभव के आधार पर इस फील्ड में 60 हजार से एक लाख रुपये तक की मासिक कमाई हो सकती है।
बैचलर ऑफ फार्मेसी (B.Pharm)
बैचलर ऑफ फार्मेसी (B.Pharm) को लेकर डॉ. निखिल बंसल बताते हैं कि दवा उद्योग भारत के सबसे बड़े सेक्टरों में से एक है। यह चार साल का कोर्स छात्रों को दवाओं के निर्माण, गुणवत्ता और उपयोग की समझ देता है। शुरुआती सैलरी 20 से 35 हजार रुपये के बीच रहती है, जो अनुभव के साथ बढ़ती जाती है। प्रवेश राज्य स्तरीय परीक्षाओं या मेरिट के आधार पर होता है।
बैचलर ऑफ वोकेशन (B.Voc)
कम फीस में जल्दी नौकरी चाहने वालों के लिए बैचलर ऑफ वोकेशन (B.Voc) भी एक विकल्प है। रेडियोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर, डायलिसिस और इमरजेंसी केयर जैसे क्षेत्रों में इन प्रोफेशनल्स की जरूरत रहती है। हालांकि इसकी स्वीकार्यता नर्सिंग या फिजियोथेरेपी जितनी व्यापक नहीं मानी जाती, लेकिन रोजगार के मौके मौजूद हैं।
कॉस्मेटोलॉजी और एस्थेटिक मेडिसिन
इसके अलावा कॉस्मेटोलॉजी और एस्थेटिक मेडिसिन भी तेजी से बढ़ता क्षेत्र है। त्वचा, बाल, एंटी-एजिंग, लेजर ट्रीटमेंट, बोटॉक्स और फिलर्स जैसे उपचारों की मांग शहरों में लगातार बढ़ रही है। इस फील्ड में आमतौर पर एमबीबीएस डॉक्टरों को प्राथमिकता मिलती है, लेकिन डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स के जरिए भी करियर बनाया जा सकता है।
डॉ. बंसल यह भी बताते हैं कि पैरामेडिकल के अलावा BAMS (आयुर्वेद), BHMS (होम्योपैथी), BNYS (योग और नेचुरोपैथी) और BUMS (यूनानी) जैसे वैकल्पिक मेडिकल कोर्स भी छात्रों के लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
कुल मिलाकर, हेल्थ सेक्टर में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों के लिए पैरामेडिकल कोर्स एक मजबूत और व्यावहारिक रास्ता बन चुके हैं। सही जानकारी, रुचि और स्किल के साथ चुना गया कोर्स न सिर्फ नौकरी देता है, बल्कि समाज में सम्मान और स्थिर भविष्य भी सुनिश्चित करता है।




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