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भारत के स्कूली छात्रों में बढ़ रही नशे की लत, AIIMS के अध्ययन में सामने आई डरावनी सच्चाई

Rising Drug Addiction in Childhood: Survey in 10 Indian Cities Reveals a Grim Picture

भारत के दस बड़े शहरों में किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण ने बच्चों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। करीब 5,900 स्कूली छात्रों पर हुए इस अध्ययन में पाया गया कि बच्चे औसतन 12.9 वर्ष की उम्र में ही नशीले पदार्थों के संपर्क में आ जाते हैं। यह रिपोर्ट AIIMS के वैज्ञानिकों और अन्य विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई है और नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुई है।

किस तरह किया गया अध्ययन

सर्वे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, जयपुर और लखनऊ सहित कई शहरी व ग्रामीण इलाकों के सरकारी और निजी स्कूलों में किया गया। इसमें 8वीं, 9वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को शामिल किया गया। अध्ययन का उद्देश्य छात्रों के व्यवहार, घर के माहौल और नशे से जुड़ी आदतों को समझना था। 

छात्रों से तंबाकू, शराब, भांग, नशीली दवाओं और अन्य पदार्थों के सेवन की आवृत्ति, पहली बार सेवन की उम्र और उससे जुड़े कारणों पर सवाल पूछे गए। सर्वे के दौरान 15% छात्रों ने स्वीकार किया कि उन्होंने जीवन में कम से कम एक बार किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया है। 10% छात्रों ने बताया कि उन्होंने पिछले एक साल में नशे का इस्तेमाल किया।

विशेषज्ञों की चेतावनी

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय किशोरों में नशा शुरू करने की उम्र वैश्विक औसत से भी कम है। विशेषज्ञ इस बात को बेहद चिंताजनक मानते हैं। उनका कहना है कि 12 वर्ष या उससे कम आयु में ही नशा-निवारण और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए, क्योंकि यही वह उम्र है जब बच्चों का व्यवहार और सोच तेजी से विकसित होती है।

अध्ययन में शामिल 25% छात्रों ने बताया कि उनके घरों में अक्सर तनाव, कलह या अस्थिर माहौल रहता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ऐसा वातावरण बच्चों को मानसिक तौर पर कमजोर बनाता है और वे गलत साथ, गलत गतिविधियों और नशीले पदार्थों की ओर जल्दी झुक जाते हैं।

चेतावनी का संदेश

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस उम्र में रोकथाम और जागरूकता के उपाय मजबूत नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में किशोरों में नशे की लत के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

परिवारों, स्कूलों और समुदायों को मिलकर बच्चों के लिए सुरक्षित और सहयोगी वातावरण तैयार करना होगा, ताकि वे नशे जैसे खतरनाक रास्ते से दूर रह सकें।

 

एडइनबॉक्स टीम

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