
क्या खेती सिर्फ आजीविका का साधन रह गई है, या इसे नए दौर के अवसरों से जोड़ा जा सकता है? असम के लखीमपुर जिले के एक शिक्षक ने इस सवाल का व्यावहारिक जवाब दिया है। उन्होंने खेती को पर्यटन से जोड़कर न सिर्फ आमदनी का नया मॉडल खड़ा किया, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक रास्ता दिखाया है।
लखीमपुर के रोंगपुरिया जराधारा गांव के निवासी शिक्षक प्रणब भजोनी ने अपने करीब 10 बीघा खेत को एक आकर्षक कृषि-पर्यटन स्थल में बदल दिया है। इस पहल का नाम है—‘बोनफूल’। जनवरी 2025 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आज इलाके की पहचान बनता जा रहा है। खेती, प्रकृति और मनोरंजन को एक साथ जोड़कर बोनफूल ने यह साबित किया है कि सही सोच और योजना से खेती भी एक सफल उद्यम बन सकती है।
प्रणब भजोनी का खेती से रिश्ता पारिवारिक है। उनके पिता हीरा भजोनी सम्मानित किसान और राज्य पुरस्कार से सम्मानित रह चुके हैं। इसी विरासत और अनुभव ने प्रणब को खेती के नए प्रयोग के लिए प्रेरित किया। शिक्षक की नौकरी के साथ-साथ वे लंबे समय से यह सोचते रहे कि खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखकर, एक अनुभव के रूप में लोगों तक पहुंचाया जाए। करीब एक दशक की योजना के बाद बोनफूल का सपना साकार हुआ।
बोनफूल आज सिर्फ एक फार्म नहीं, बल्कि एक संपूर्ण ग्रामीण अनुभव है। यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति के करीब समय बिताते हैं और गांव की सादगी को महसूस करते हैं। परिसर में ट्रीहाउस, बांस के पुल, नौका विहार, मछली पकड़ने की सुविधा और हल्के-फुल्के एडवेंचर गेम्स मौजूद हैं। खेतों और बागों का भ्रमण कर लोग संतरा, स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट और बेर जैसे मौसमी फलों को खुद तोड़कर चख सकते हैं। खास आकर्षण है ऑर्किड हाउस, जहां 100 से ज्यादा प्रजातियों के ऑर्किड देखने को मिलते हैं।
परिवारों और बच्चों के लिए यहां खेल क्षेत्र, सब्जी उद्यान, हैंगिंग ब्रिज और शांत प्राकृतिक माहौल उपलब्ध है। यही वजह है कि बोनफूल अब छात्रों, परिवारों और प्रकृति प्रेमियों के लिए पसंदीदा जगह बनता जा रहा है।
शुरुआत के एक साल के भीतर ही बोनफूल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। रोजाना औसतन करीब 100 पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इस पहल से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी बने हैं। फिलहाल करीब 10 लोग सीधे तौर पर यहां काम कर रहे हैं, जबकि लगभग 20 लोग अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। मौसम और पर्यटकों की संख्या के अनुसार यह आंकड़ा आगे और बढ़ने की उम्मीद है।
प्रणब भजोनी इस पहल को सिर्फ व्यवसाय नहीं मानते। उनका कहना है कि आज के समय में जब युवा खेती से दूरी बना रहे हैं, तब कृषि पर्यटन उन्हें खेती के महत्व, संभावनाओं और सुंदरता से जोड़ सकता है। उनके अनुसार खेती न सिर्फ आजीविका देती है, बल्कि सुरक्षा, ज्ञान और आत्मनिर्भरता का आधार भी बन सकती है। बोनफूल के जरिए वे यही संदेश लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।
आने वाले समय में प्रणब भजोनी बोनफूल को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि रोंगपुरिया जराधारा गांव को एक मॉडल ग्रामीण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, जहां स्थानीय समुदाय की भागीदारी से सतत विकास हो सके। इस प्रयास को स्थानीय लोगों, विशेषज्ञों और प्रशासन से भी सकारात्मक समर्थन मिल रहा है।
हरी-भरी खेती, नवाचार और सामुदायिक सहयोग के मेल ने बोनफूल को लखीमपुर की नई पहचान बना दिया है। यह पहल बताती है कि मिट्टी से जुड़ा एक सरल विचार भी अगर सही दिशा में आगे बढ़े, तो पूरे क्षेत्र में नई ऊर्जा और उम्मीद जगा सकता है।




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