
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में तेज़ी से विस्तार करने जा रही है। एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2029-30 तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आकार करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इस तेज़ वृद्धि के पीछे सबसे बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती क्षमता और इसका व्यापक इस्तेमाल बताया गया है, जो देश की आर्थिक और तकनीकी दिशा को नया रूप देने वाला है।
2027 तक 17 अरब डॉलर का हो सकता है भारत का एआई बाजार
टीमलीज डिजिटल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एआई बाजार वर्ष 2027 तक लगभग 17 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही एआई से जुड़े पेशेवरों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ेगी और यह आंकड़ा करीब 12.5 लाख तक पहुंच सकता है। यह वैश्विक एआई टैलेंट का लगभग 16 प्रतिशत होगा। इससे साफ है कि भारत एआई के क्षेत्र में तेजी से एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है।
उच्च वेतन वाली एआई भूमिकाओं में तेज़ उछाल
रिपोर्ट में कहा गया है कि एंटरप्राइज एआई पर बढ़ते निवेश, राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म और मजबूत एसटीईएम शिक्षा प्रणाली के चलते उच्च मूल्य वाली एआई नौकरियों में तेज़ी से इजाफा हो रहा है। इसके उलट, पारंपरिक आईटी भूमिकाओं की मांग अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।
2026 में जिन एआई स्किल्स की रहेगी सबसे ज्यादा मांग
रिपोर्ट में छह ऐसी एआई स्किल्स की पहचान की गई है, जिनकी मांग वर्ष 2026 तक सबसे अधिक रहने की उम्मीद है। इनमें शामिल हैं—
– Simulation Governance (26–35 लाख रुपये सालाना)
– Agent Design (25–32 लाख रुपये सालाना)
– AI Orchestration (24–30 लाख रुपये सालाना)
– Prompt Engineering (22–28 लाख रुपये सालाना)
– LLM Safety and Tuning (20–26 लाख रुपये सालाना)
– AI Compliance and Risk Operations (18–24 लाख रुपये सालाना)
इन आंकड़ों से साफ है कि एआई से जुड़ी उन्नत और जिम्मेदारी वाली भूमिकाओं में वेतन स्तर काफी ऊंचा बना हुआ है।
दुनिया की 40% नौकरियों पर पड़ेगा एआई का असर
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर करीब 40 प्रतिशत नौकरियों पर एआई का असर पड़ने की संभावना है। इसका प्रभाव खासतौर पर आईटी सेवाओं, हेल्थकेयर, बैंकिंग-फाइनेंस-इंश्योरेंस (BFSI) और कस्टमर एक्सपीरियंस जैसे क्षेत्रों में देखने को मिलेगा।
डेटा साइंस से आगे बढ़ रहा है एआई का इस्तेमाल
कंपनियां अब एआई को केवल डेटा साइंस तक सीमित नहीं रख रही हैं। इसका इस्तेमाल लीडरशिप, ऑपरेशंस, रिस्क मैनेजमेंट और कंप्लायंस जैसे अहम क्षेत्रों में भी किया जा रहा है। इसके चलते बड़े पैमाने पर स्किल डेवलपमेंट और मानव-एआई के साझा वर्कफ्लो पर ज़ोर बढ़ रहा है।
एंटरप्राइज-ग्रेड एआई स्किल्स की बढ़ती मांग
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि सामान्य एआई भूमिकाओं की तुलना में एंटरप्राइज-ग्रेड एआई स्किल्स की मांग कहीं अधिक है। इनमें गवर्नेंस, भरोसेमंद सिस्टम, समन्वय और स्केलेबिलिटी से जुड़े कौशल शामिल हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर इस मामले में आगे हैं, जहां ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, एआई-फर्स्ट स्टार्टअप्स और बड़े एंटरप्राइज सक्रिय हैं।
मिड-लेवल प्रोफेशनल्स बन रहे हैं एआई की अहम कड़ी
रिपोर्ट के अनुसार, मिड-लेवल प्रोफेशनल्स की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। ये पेशेवर एआई को गवर्नेंस, समन्वय और वास्तविक व्यावसायिक जरूरतों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यही वर्ग आने वाले समय में एआई के व्यावहारिक और जिम्मेदार इस्तेमाल की रीढ़ बनने वाला है।
कुल मिलाकर, एआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि भविष्य की विकास यात्रा का मजबूत आधार बनता जा रहा है।




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