
दक्षिण कोरिया ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए दुनिया का पहला AI बेसिक एक्ट लागू कर दिया है। इस कदम के साथ दक्षिण कोरिया ने यूरोपियन यूनियन से बढ़त बना ली है, जहां AI Act साल 2027 से लागू होगा। हालांकि, नए कानून ने स्थानीय स्टार्टअप्स के बीच तुरंत चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि सख्त नियम इनोवेशन की गति को कम कर सकते हैं और नए प्रयोग शुरू होने से पहले ही रुकावटें पैदा कर सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया का लक्ष्य खुद को दुनिया की शीर्ष तीन AI पावरहाउस देशों की सूची में शामिल करना है। यह कानून उसी दिशा में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
किन क्षेत्रों में होगी मानवीय निगरानी?
नए AI कानून के तहत कंपनियों को कुछ महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में AI के उपयोग पर मानवीय निगरानी अनिवार्य रूप से रखनी होगी। इसमें परमाणु सुरक्षा, पीने के पानी का उत्पादन, यातायात प्रणाली, स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय गतिविधियां शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल के बावजूद मानवीय हस्तक्षेप जरूरी है, ताकि सुरक्षा और विश्वसनीयता बनी रहे।
AI प्रोडक्ट पर लेबलिंग और पारदर्शिता नियम
कंपनियों को अब यह भी बताना होगा कि उपयोगकर्ता जिन प्रोडक्ट या सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनमें AI का उपयोग हो रहा है। इसके साथ ही AI जनरेटेड कंटेंट पर स्पष्ट लेबल या वॉटरमार्क लगाना अनिवार्य होगा।
यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि AI से बनी सामग्री कई बार वास्तविक जैसी दिखती है, जिससे उपयोगकर्ताओं के लिए असली और जनरेटेड चीजों में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।
स्टार्टअप्स का विरोध: “हमें पहला क्यों बनना पड़ा?”
दक्षिण कोरिया के कई स्टार्टअप्स इस कानून से असहज महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कानून अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। सख्त नियम उन्हें सुरक्षित खेल खेलने के लिए मजबूर कर सकते हैं जिससे इनोवेशन की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
स्टार्टअप अलायंस द्वारा किए गए एक सर्वे में सामने आया कि केवल 2% AI स्टार्टअप्स के पास औपचारिक अनुपालन योजना है, जबकि लगभग आधे स्टार्टअप नए कानून को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।
अलायंस के सह-प्रमुख लिम जंग-वूक के अनुसार, “थोड़ी नाराज़गी जरूर है… हम पहले क्यों बने?” संस्थापकों की सबसे बड़ी चिंता है कानून की अस्पष्टता, जो उन्हें अत्यधिक सतर्क डेवलपमेंट नीति अपनाने पर मजबूर कर सकती है।
कंपनियों के लिए सपोर्ट डेस्क और संभावित जुर्माना
विज्ञान और ICT मंत्रालय (MSIT) ने कंपनियों की सहायता के लिए एक AI Act सपोर्ट डेस्क भी शुरू किया है। यह डेस्क कंपनियों को नियम समझने और अपनी नियामक स्थिति तय करने में मदद करेगा।
एक साल की ग्रेस अवधि तय की गई है, जिसके दौरान नियमों का पूर्ण पालन न करने पर जुर्माना नहीं लगेगा। इसके बाद कंपनियों पर 30 मिलियन वॉन (लगभग 20,400 डॉलर) तक का जुर्माना लग सकता है। सरकार का कहना है कि यह जुर्माना EU की तुलना में काफी कम है।
AI विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती
दक्षिण कोरिया का यह नया AI बेसिक एक्ट एक तरफ देश को ग्लोबल AI लीडर बनाने की दिशा में कदम है, वहीं दूसरी ओर स्टार्टअप्स की चिंताओं ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
कानून का स्पष्ट उद्देश्य है- AI इनोवेशन को बढ़ावा देना और संभावित जोखिमों को नियंत्रित रखना। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि दुनिया का पहला AI कानून टेक्नोलॉजी के विकास, सुरक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम पर क्या प्रभाव डालता है।




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